
बोड़ाम/पटमदा/जमशेदपुर : गांव के मैदान पर लड़के और लड़कियां साथ खेलकर समानता की नई कहानी लिख रहे हैं। पटमदा बोड़ाम प्रीमियर लीग यानी पीबीपीएल 2026 के अंडर-16 मिक्स जेंडर क्रिकेट का फाइनल मुकाबला तय हो गया है। छह नवंबर को कैप्टन सलीमा टेटे एकादश और ओलंपियन जयपाल सिंह मुंडा एकादश खिताब के लिए आमने-सामने होंगी। खेल के साथ यह आयोजन ग्रामीण समाज में बराबरी, सहयोग और आपसी सम्मान का संदेश भी पहुंचा रहा है।
27 रनों की जीत से मिला फाइनल का टिकट
एसएस पटमदा प्लस टू उच्च विद्यालय मैदान पर दूसरे सेमीफाइनल में कैप्टन सलीमा टेटे एकादश ने धनुर्धर दीपिका कुमारी एकादश को 27 रनों से हराया। टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी सलीमा टेटे एकादश ने निर्धारित सात ओवरों में एक विकेट पर 73 रन बनाए। भक्त रंजन महतो ने 25 गेंदों में 30 रनों की पारी खेली। रूपाली महतो ने अंतिम समय में तेजी दिखाते हुए सिर्फ चार गेंदों पर तीन चौकों की मदद से नाबाद 13 रन जोड़े। जवाब में दीपिका कुमारी एकादश सात ओवरों में चार विकेट पर 46 रन ही बना सकी। विधान करमाकर, प्रतिमा महतो, सुलेखा महतो और धनिवाला महतो ने एक-एक विकेट लिया।
पिछली बार बाहर, इस बार खिताब के दावेदार
पहले सेमीफाइनल में ओलंपियन जयपाल सिंह मुंडा एकादश ने पर्वतारोही विनीता सोरेन एकादश को 10 रनों से हराया था। दिलचस्प बात यह है कि जनवरी में आयोजित मिक्स जेंडर विलेज क्रिकेट लीग की विजेता दीपिका कुमारी एकादश और उपविजेता विनीता सोरेन एकादश, दोनों इस बार सेमीफाइनल में बाहर हो गईं। उस प्रतियोगिता के लीग चरण में बाहर हुई दोनों टीमें अब फाइनल खेलेंगी। बच्चों के लिए यह बदलाव मेहनत, नियमित अभ्यास और टीम भावना से आगे बढ़ने की प्रेरणा है।
यूट्यूब पर अपनों को खेलते देखेंगे परिजन
पीबीपीएल सीजन-2 का आयोजन दो से छह नवंबर तक बोड़ाम के दिघी भुला उच्च प्लस टू विद्यालय मैदान में हो रहा है। पुरुष वर्ग में 10 टीमें हिस्सा ले रही हैं। मुकाबलों के यूट्यूब प्रसारण को लेकर बच्चे उत्साहित हैं। उनके अभिभावक और परिचित घर बैठे खिलाड़ियों का प्रदर्शन देख सकेंगे। सेमीफाइनल में अमर दास, आशीष ओझा और विवेक दत्ता ने अंपायरिंग की। वृंदावन महतो, फिल्मकार प्रकाश केशरी और निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार भी मौजूद रहे।
क्रिकेट से सामाजिक बदलाव की कोशिश
आयोजकों के अनुसार, तरुण कुमार ने वर्ष 2018 में झारखंड में मिक्स जेंडर क्रिकेट की शुरुआत की थी। इस पहल को सचिन तेंदुलकर की सराहना भी मिली थी। इसके माध्यम से बच्चों को शिक्षा, माहवारी स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व के प्रति जागरूक किया जाता है। उद्देश्य है कि गांव की लड़कियों को भी खेल मैदानों में बराबर अवसर मिलें और वे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा दिखा सकें।












