
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्रियों से किया संवाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के साथ फेलोशिप का हुआ समापन
- सांसद के साथ किया नीतिगत शोध, विकसित भारत के विजन को समझने का मिला अवसर
जमशेदपुर : लौह नगरी जमशेदपुर की बेटी उत्कर्षा सिन्हा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन से प्रेरित फेलोशिप कार्यक्रम में देशभर से आए 5000 से अधिक आवेदनों में से केवल 40 युवाओं का चयन किया गया, जिसमें उत्कर्षा ने भी अपनी जगह बनाई। इस प्रतिष्ठित फेलोशिप का गौरवपूर्ण समापन राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के साथ हुआ। यह उपलब्धि उत्कर्षा के साथ-साथ जमशेदपुर के लिए भी गर्व का विषय बन गई है।
5000 आवेदनों के बीच कठिन चयन प्रक्रिया में बनाई जगह
इस फेलोशिप के लिए चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), निबंध लेखन और साक्षात्कार शामिल थे। देशभर से प्राप्त 5000 से अधिक आवेदनों में से बहुस्तरीय प्रक्रिया के बाद सिर्फ 40 युवाओं को फेलोशिप के लिए चुना गया। कार्यक्रम के दौरान चार समूह बनाए गए, जिनमें प्रत्येक समूह में 10 प्रतिभागी शामिल थे। युवाओं को समूहगत शोध पत्र तैयार करने के साथ व्यक्तिगत शोध पत्र लिखने की जिम्मेदारी भी दी गई।
विदेश मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक से किया संवाद
फेलोशिप के दौरान उत्कर्षा को महाराष्ट्र के नांदेड़ क्षेत्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े के साथ काम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने देश की नीतिगत प्राथमिकताओं, शासन व्यवस्था और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध किया। शोध कार्य के क्रम में उन्हें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उपराष्ट्रपति सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों से संवाद करने का अवसर मिला। इन मुलाकातों से उन्हें देश की नीति निर्माण प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझने का अनुभव प्राप्त हुआ।
केरला समाजम स्कूल से बीएचयू और एमिटी यूनिवर्सिटी तक का सफर
उत्कर्षा सिन्हा ने अपनी स्कूली शिक्षा जमशेदपुर के केरला समाजम मॉडल स्कूल से पूरी की। इसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की। उन्होंने एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से लोक प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उन्हें फेलोशिप के दौरान नीतिगत विषयों पर अध्ययन और शोध करने में मदद की।
परिवार के विश्वास को बताया अपनी ताकत
उत्कर्षा अपनी इस उपलब्धि का श्रेय परिवार के विश्वास और सहयोग को देती हैं। उनके पिता संजू आनंद सफल व्यवसायी हैं, जबकि मां उपासना सिन्हा प्रतिष्ठित कवयित्री हैं। बड़ी बहन आकांक्षा और जीजाजी विनीत को भी वह अपनी ताकत मानती हैं। उनका कहना है कि परिवार के निरंतर सहयोग और विश्वास ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का हौसला दिया।
‘UPSC ही राष्ट्रसेवा का एकमात्र रास्ता नहीं’
उत्कर्षा का लक्ष्य अपनी शिक्षा, ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करना है। उनका मानना है कि राष्ट्रसेवा के लिए किसी एक निश्चित पद या रास्ते का होना जरूरी नहीं है। सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) उनके लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प जरूर है, लेकिन वह इसे देश की सेवा का एकमात्र माध्यम नहीं मानतीं। उनका विचार है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अपने उद्देश्य की ओर बढ़ने का प्रयास कभी नहीं छोड़ना चाहिए। वह कहती हैं कि जीवन का लक्ष्य प्रतिदिन स्वयं को बेहतर इंसान बनाना और अपनी क्षमता के अनुसार समाज तथा देश के विकास में योगदान देना है।
राष्ट्रपति से मुलाकात बनी यादगार पल
फेलोशिप की पूरी यात्रा का समापन राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के साथ हुआ। उत्कर्षा के लिए यह पल भावुक, अविस्मरणीय और गौरवपूर्ण रहा। उनके अनुसार, यह फेलोशिप महज एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि राष्ट्र निर्माण, नीति निर्माण और जनसेवा की समझ विकसित करने वाली महत्वपूर्ण यात्रा रही। इस अनुभव ने उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारी को और गहराई से समझने का अवसर दिया।












