
- प्रांत की जगह संभाग व्यवस्था लागू करने की योजना, नगर से लेकर बस्तियों तक बढ़ेंगी संगठन की इकाइयां
- इंदौर की बैठक में प्रस्तावों पर बनेगी सहमति, दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या भी दोगुनी से अधिक करने की तैयारी
रांची : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके तहत प्रांत की जगह संभाग व्यवस्था लागू करने के साथ ही विभाग, जिला, मंडल, नगर और बस्तियों की संख्या बढ़ाने की योजना है। संगठनात्मक जिलों की संख्या वर्तमान में करीब 924 से बढ़ाकर 1500 से 1600 के बीच करने का प्रस्ताव है। सभी प्रांतों में इस दिशा में काम लगभग पूरा हो चुका है। अब मध्य प्रदेश के इंदौर में दो नवंबर से प्रस्तावित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में इन बदलावों पर सहमति बनने की संभावना है।
संघ की इस नई योजना का उद्देश्य देश के सभी मंडलों और बस्तियों तक संगठन का काम पहुंचाना है। इसके लिए संगठन की निचली इकाइयों को मजबूत करने के साथ जिम्मेदारियों का विस्तार किया जाएगा। अधिकारों के विकेंद्रीकरण पर भी काम हो रहा है, ताकि विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
नगर से लेकर बस्तियों तक बढ़ेगा संगठन का दायरा
प्रस्तावित बदलाव के तहत केवल जिलों की संख्या ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि नगरों, विभागों, मंडलों और बस्तियों की संगठनात्मक इकाइयों में भी विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या भी दोगुनी से अधिक करने की योजना है। फिलहाल पूरे देश में ऐसे स्वयंसेवकों की संख्या करीब पांच लाख बताई गई है।
संगठनात्मक इकाइयों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियों का बंटवारा भी नए सिरे से होगा। संघ की योजना देश के अधिक से अधिक क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को पहुंचाने और संगठनात्मक व्यवस्था को नए स्वरूप में ढालने की है।
मार्च के बाद नई व्यवस्था के तहत होंगे बदलाव
संघ की प्रस्तावित योजना के अनुसार, अगले वर्ष मार्च के बाद संगठनात्मक पदों और जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था में प्रदेश कार्यवाह और प्रचारक जैसे दायित्व सामने आएंगे। इसके साथ ही संभाग स्तर पर पूरी कार्यकारिणी गठित करने की योजना है। इससे संगठन के कामकाज और जिम्मेदारियों का निर्धारण नए ढांचे के अनुरूप किया जाएगा।
इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
बैठक से पहले भी होगा मंथन
दो नवंबर से इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में प्रस्तावित तीन दिवसीय बैठक से पहले विभिन्न स्तरों पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा। 29 अक्टूबर को छोटी टोली की बैठक होगी। इसके बाद 30 अक्टूबर को अखिल भारतीय अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। 31 अक्टूबर को अखिल भारतीय अधिकारियों के साथ सभी क्षेत्र कार्यवाह और प्रचारक शामिल होंगे। एक नवंबर को प्रांत कार्यवाह, प्रचारक और उनके सहयोगियों की बैठक होगी।
दो नवंबर से शुरू होने वाली मुख्य बैठक में सभी क्षेत्रों और प्रांतों के संघचालक तथा समवैचारिक संगठनों के अखिल भारतीय प्रमुख भी शामिल होंगे। प्रस्तावित बदलावों के तहत अगले वर्ष से अखिल भारतीय स्तर की बैठक के बजाय क्षेत्रवार बैठक आयोजित करने की व्यवस्था भी बनाई जा रही है। इन बैठकों में अखिल भारतीय स्तर के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।












