
बोकारो : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के संभावित नतीजों में बोकारो इस्पात संयंत्र की मजबूत हिस्सेदारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का मुनाफा 4,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। इसमें अकेले बोकारो इस्पात संयंत्र का योगदान लगभग 1,500 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की औपचारिक घोषणा बोर्ड बैठक के बाद होने की बात कही गई है।
कमाई में अन्य संयंत्रों से आगे बोकारो
रिपोर्ट में दिए गए इकाईवार अनुमानों के अनुसार, बोकारो इस्पात संयंत्र सबसे आगे है। राउरकेला इस्पात संयंत्र का संभावित लाभ करीब 1,200 करोड़ रुपये और भिलाई का लगभग 1,000 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं, दुर्गापुर के लिए 300 करोड़ तथा इस्को बर्नपुर के लिए 200 करोड़ रुपये के मुनाफे की संभावना जताई गई है। ये आंकड़े पहली छमाही में कंपनी की कमाई में विभिन्न संयंत्रों की संभावित हिस्सेदारी दर्शाते हैं। अंतिम वित्तीय परिणाम जारी होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
बोर्ड बैठक में नतीजों पर रहेगी नजर
दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार को नई दिल्ली में प्रस्तावित सेल के निदेशक मंडल की बैठक में वित्तीय परिणामों की औपचारिक घोषणा की जानी है। बैठक में प्रमुख इस्पात संयंत्रों के निदेशक प्रभारियों के साथ कार्यकारी और स्वतंत्र निदेशकों की मौजूदगी की बात कही गई है। संभावित मुनाफे के बीच अब इस बैठक से सामने आने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर नजर रहेगी।
महंगा कोयला और श्रमिकों की कमी बनी चुनौती
कमाई के सकारात्मक अनुमानों के साथ उत्पादन संबंधी परेशानियां भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कोयले की बढ़ती लागत ने कंपनी के लाभ पर दबाव डाला है। इसके अतिरिक्त, बोकारो सहित विभिन्न इकाइयों में ठेका श्रमिकों की संख्या घटने से कामकाज प्रभावित होने की बात कही गई है। श्रमबल की कमी और उपकरणों में खराबी के कारण उत्पादन की गति धीमी पड़ने का उल्लेख भी किया गया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग रहने के बावजूद इन बाधाओं को दूर करना कंपनी के लिए अहम चुनौती बना हुआ है।
प्रबंधन में हस्तक्षेप पर पूर्व पदाधिकारी ने उठाए सवाल
स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व महासचिव विमल कुमार विशी ने मंत्रालय की कार्यप्रणाली और सेल के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ठेका श्रमिकों की कटौती और उचित पद पर उचित व्यक्ति की नियुक्ति संबंधी नीति की अनदेखी से योजनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि मुख्यालय को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलने पर सालाना मुनाफा 14,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। यह उनका आकलन है; कंपनी की वास्तविक वित्तीय उपलब्धि आधिकारिक परिणामों से ही तय होगी।












