
चाकुलिया: जिस विद्यालय में कभी बच्चों की पढ़ाई और उनकी आवाज से रौनक रहती थी, आज उसी बंद स्कूल के कमरे में एक सबर परिवार रहने को मजबूर है। चाकुलिया प्रखंड की मालकुंडी पंचायत के बड़ामचाटी गांव में जसौदा सबर अपने पति और दो बच्चों के साथ जिंदगी गुजार रही हैं। परिवार को सरकारी आवास योजना के तहत पहली किस्त तो मिली, लेकिन पिछले करीब आठ महीने से अगली किस्त का भुगतान नहीं होने के कारण घर का निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। नतीजतन, परिवार को सिर छिपाने के लिए बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय के भवन का सहारा लेना पड़ रहा है।
जसौदा सबर के अनुसार, काफी प्रयास और लोगों की मदद से उन्हें सरकारी आवास स्वीकृत हुआ था। करीब आठ महीने पहले घर बनाने के लिए पहली किस्त की राशि मिली थी। इसके बाद अगली किस्त नहीं मिलने से निर्माण कार्य अटक गया। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से घर का काम पूरा करा सकें। ऐसे में परिवार के सामने रहने की जगह का संकट बना हुआ है। मजबूरी में उन्हें अपने पति और बच्चों के साथ बंद विद्यालय के कमरे में रहना पड़ रहा है।
आवास की समस्या के साथ भोजन और पोषण की चिंता
परिवार की परेशानी केवल आवास तक सीमित नहीं है। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें भोजन और बच्चों के पोषण की जरूरतें पूरी करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। परिवार का गुजारा मुख्य रूप से सरकारी राशन से मिलने वाले चावल के सहारे हो रहा है। आर्थिक तंगी के कारण पौष्टिक भोजन जुटाना भी चुनौती बना हुआ है।
गांव से आंगनबाड़ी केंद्र की दूरी और स्कूल तक पहुंचने में होने वाली परेशानी के कारण बच्चों को नियमित सुविधाएं मिल पा रही हैं या नहीं, यह भी जांच का विषय है। आवास के अभाव और सीमित संसाधनों के बीच परिवार को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
फंड की कमी से रुका भुगतान
इस मामले में आवास योजना के प्रखंड समन्वयक सुनील हांसदा ने बताया कि फंड की कमी के कारण पिछले आठ महीने से आवास योजना की राशि का भुगतान रुका हुआ है। मामले से उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि फंड उपलब्ध होते ही आवास निर्माण का काम पूरा कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
अब परिवार को इंतजार है कि आवास योजना की अगली किस्त कब मिलेगी और उनका अपना घर कब बनकर तैयार होगा। फिलहाल, जिस स्कूल में कभी बच्चों की पढ़ाई होती थी, उसी भवन में एक परिवार अपने लिए सुरक्षित आशियाने की उम्मीद लगाए बैठा है।











