
- फिक्स्ड डिपॉजिट, आरडी और सेविंग खातों की मियाद पूरी, फिर भी वर्षों से भुगतान के लिए भटक रहे खाताधारक
- स्वर्णरेखा परियोजना और चांडिल डैम के विस्थापित किसानों के भी पैसे फंसे, प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
सरायकेला-खरसावां : ईचागढ़ लैम्प्स में जमा पूंजी का भुगतान नहीं होने से नाराज खाताधारकों और जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। रविवार को चौका थाना के सामने स्थित ट्राइडेंट होटल में आयोजित बैठक में 1 नवंबर से ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया। बैठक में जिला परिषद सदस्य, विभिन्न पंचायतों के मुखिया और बड़ी संख्या में पीड़ित खाताधारक शामिल हुए। खाताधारकों का आरोप है कि वर्षों से अपनी ही जमा पूंजी वापस पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
बंद पड़ा लैम्प्स, मियाद पूरी होने पर भी भुगतान नहीं
ईचागढ़ भाग-2 के जिला परिषद सदस्य ज्योतिलाल माझी ने कहा कि ईचागढ़ लैम्प्स पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। यहां फिक्स्ड डिपॉजिट, आरडी और सेविंग खातों में पैसे जमा करने वाले लोगों को मियाद पूरी होने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन किसानों की है, जिन्होंने स्वर्णरेखा परियोजना और चांडिल डैम से विस्थापन के बाद मुआवजे में मिली राशि का कुछ हिस्सा लैम्प्स में जमा किया था।
ज्योतिलाल माझी के अनुसार, कई खाताधारक अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद लगाए रहे, लेकिन भुगतान का इंतजार करते-करते उनकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद उनके परिवारों को भी राहत नहीं मिल सकी है। लैम्प्स का कार्यालय भी बंद होने के कारण खाताधारकों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनकी जमा राशि का क्या हुआ।
दो साल से पत्राचार, फिर भी समाधान नहीं
जिला परिषद सदस्य ने बताया कि पीड़ित खाताधारक और जनप्रतिनिधि पिछले करीब दो वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पत्राचार कर रहे हैं। हर बार जांच चलने की बात कहकर मामले को टाल दिया जाता है। खाताधारकों का कहना है कि जब उनके पास जमा राशि से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं, तो भुगतान की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।
ज्योतिलाल माझी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के सांसद और विधायक ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया। उन्होंने मामले में निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक मिलीभगत की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
सैकड़ों आवेदन, फिर भी खाताधारकों को राहत नहीं
बैठक में बताया गया कि पीड़ित खाताधारक अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए संबंधित कार्यालयों में सैकड़ों आवेदन दे चुके हैं। कई लोगों के पास जमा राशि से जुड़े दस्तावेज और अन्य कागजात मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं हो पाया है।
इचागढ़ थाना क्षेत्र के दियाडीह निवासी फुलवाला महतो ने भी अपनी जमा राशि वापस दिलाने की मांग की है। उन्होंने जिला परिषद सदस्य को दिए आवेदन में ईचागढ़ लैम्प्स में 1.40 लाख रुपये जमा होने का उल्लेख किया है। यह मामला उन सैकड़ों खाताधारकों की परेशानी को सामने लाता है, जिनकी मेहनत की कमाई वर्षों से फंसी हुई है।
मुखिया बोले- ब्याज समेत लौटाई जाए राशि
चिमटिया पंचायत के मुखिया अविराम हेम्रम ने कहा कि किसानों ने अपनी खून-पसीने की कमाई लैम्प्स में जमा की थी। कई लोगों ने चांडिल डैम विस्थापन के दौरान मिली मुआवजे की राशि को भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जमा किया था। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ित खाताधारकों की पूरी जमा राशि ब्याज समेत वापस दिलाई जाए।
पातकुम पंचायत के मुखिया राखो हरि सिंह मुंडा ने कहा कि शुरुआत में लगा था कि मामला एक-दो खाताधारकों तक सीमित है, लेकिन अब अलग-अलग गांवों में 300 से 500 लोगों की राशि फंसे होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि वरीय अधिकारियों से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण सभी ने मिलकर आंदोलन का निर्णय लिया है।
1 नवंबर से भूख हड़ताल, प्रशासन के सामने चुनौती
बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 नवंबर से ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक खाताधारकों की जमा पूंजी वापस करने की दिशा में ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
ज्योतिलाल माझी ने चेतावनी दी कि यदि भूख हड़ताल के बाद भी प्रशासन ने जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आंदोलनकारी आत्मदाह जैसे चरम कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने ऐसी स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, यह आंदोलनकारियों की चेतावनी है और मामले में प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 1 नवंबर से प्रस्तावित भूख हड़ताल से पहले प्रशासन पीड़ित खाताधारकों की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। वर्षों से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों और अन्य खाताधारकों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।












