
- टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर बढ़ा मतभेद, संगठनों ने कहा- मामला सिर्फ कॉरपोरेट विवाद नहीं, समूह की विरासत से भी जुड़ा
नई दिल्ली : टाटा समूह में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच चल रहे विवाद में अब पारसी संगठनों ने भी हस्तक्षेप किया है। कई पारसी और जोरोस्ट्रियन सामुदायिक संगठनों ने टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। संगठनों का कहना है कि यह विवाद केवल कॉरपोरेट या शेयरधारकों के बीच का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर देश के सबसे प्रतिष्ठित व्यावसायिक संस्थानों में से एक के भविष्य पर पड़ सकता है।
पत्र में संगठनों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि टाटा समूह से जुड़े मूल्यों, कॉरपोरेट गवर्नेंस और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को सुरक्षित रखने की दिशा में ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि टाटा समूह की पहचान केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी की परंपरा भी उसकी विशिष्ट पहचान रही है।
लिस्टिंग को लेकर बढ़ा विवाद
टाटा समूह में विवाद का प्रमुख मुद्दा टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ट्रस्ट्स का मानना है कि कंपनी का मौजूदा स्वामित्व ढांचा दीर्घकालिक निर्णय लेने, परोपकारी गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारी के उद्देश्यों को बनाए रखने में मदद करता है। इसी कारण ट्रस्ट्स टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के पक्ष में नहीं हैं।
दूसरी ओर, टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर कंपनी के बोर्ड के रुख ने इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ा दिए हैं। इससे कंपनी के बोर्ड और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
आरबीआइ के फैसले से फिर चर्चा में आया मामला
टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के सितंबर 2026 के फैसले के बाद फिर चर्चा में आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरबीआइ ने मूल निवेश कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण वापस लेने के लिए टाटा संस के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद लिस्टिंग की संभावनाओं और नियामकीय आवश्यकताओं को लेकर बहस तेज हुई। इस घटनाक्रम ने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच मतभेद को भी सामने ला दिया।
टाटा समूह की विरासत पर जताई चिंता
पारसी संगठनों ने अपने पत्र में कहा है कि टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग को केवल नियामकीय या तकनीकी विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, दीर्घकालिक प्रबंधन और अल्पकालिक बाजार अपेक्षाओं के बीच संतुलन बिगड़ने से टाटा संस ही नहीं, बल्कि पूरे टाटा समूह के मूल स्वरूप, मूल्यों और पहचान पर असर पड़ सकता है।
पत्र में कहा गया है कि यह भारत के सबसे सम्मानित संस्थानों में से एक के भविष्य और उसके उद्देश्य से जुड़ा सवाल है। संगठनों ने सभी संबंधित पक्षों से व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए मौजूदा चुनौतियों पर विचार करने और टाटा नाम से जुड़ी विरासत की रक्षा करने की अपील की है।
इन संगठनों ने किया समर्थन
टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में पत्र पर पारसी पंचायत बांबे के फंड एवं संपत्तियों के ट्रस्टी बोर्ड, फेडरेशन ऑफ पारसी जोरोस्ट्रियन अंजुमन ऑफ इंडिया, फेडरेशन ऑफ जोरोस्ट्रियन एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका, जोरोस्ट्रियन ट्रस्ट फंड्स ऑफ यूरोप, ग्लोबल काउंसिल ऑफ जोरोस्ट्रियन ट्रस्ट और वर्ल्ड जोरोस्ट्रियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के हस्ताक्षर हैं।
संगठनों के इस कदम से टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर जारी बहस को नया आयाम मिला है। हालांकि, इस मामले में आगे क्या निर्णय होता है, यह संबंधित पक्षों के रुख और नियामकीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।












