
नई दिल्ली : एक ही मैच में दो भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। आगे चलकर सचिन तेंदुलकर ने रिकॉर्ड की नई इबारत लिखी, जबकि सलिल अंकोला का सफर क्रिकेट के मैदान से अभिनय की दुनिया तक पहुंचा। चोटों से प्रभावित खेल करियर, फिल्मों और टेलीविजन में काम तथा बाद में चयनकर्ता की भूमिका—अंकोला की जिंदगी कई बदलावों से होकर गुजरी। उनकी कहानी खेल से मिली पहचान के बाद नए रास्ते तलाशने और मुश्किल दौर से आगे बढ़ने की भी है।
कराची में सचिन के साथ किया टेस्ट डेब्यू
15 नवंबर 1989 को कराची में पाकिस्तान के खिलाफ सचिन तेंदुलकर और सलिल अंकोला ने अपना पहला टेस्ट खेला था। तेज गेंदबाज अंकोला के लिए यही मुकाबला उनके टेस्ट करियर का इकलौता मैच साबित हुआ। इसमें उन्होंने दो विकेट हासिल किए। इससे पहले 1988 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत करते हुए अंकोला ने अपने पहले ही मैच में हैट्रिक लेकर ध्यान खींचा था। शुरुआती प्रदर्शन ने उनके लिए राष्ट्रीय टीम का रास्ता खोला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लंबे समय तक लगातार खेलने के अवसर नहीं मिले।
विश्व कप तक पहुंचे, चोटों ने रोकी राह
टेस्ट के बाद अंकोला ने दिसंबर 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया। भारत के लिए उन्होंने कुल 20 वनडे खेले। वह 1996 विश्व कप की भारतीय टीम में भी शामिल रहे और श्रीलंका के खिलाफ मैदान पर उतरे। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 1997 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन में रहा। बार-बार चोटिल होने से करियर प्रभावित हुआ और लगभग 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उनकी जिंदगी ने एक अलग दिशा पकड़ ली।
टीवी और फिल्मों में बनाई नई पहचान
क्रिकेट से दूर होने के बाद अंकोला को अभिनय के प्रस्ताव मिलने लगे। उन्होंने इस अवसर को अपनाया और मनोरंजन जगत में कदम रखा। फिल्मों के साथ टेलीविजन पर भी काम किया, जिससे उन्हें खेल प्रेमियों के अलावा दूसरे दर्शकों के बीच पहचान मिली। ‘विक्रम और गबराल’, ‘सीआईडी’ और ‘कोरा कागज’ जैसे धारावाहिकों में वह नजर आए। ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया। वर्ष 2006 में वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ के पहले सीजन का हिस्सा बने। हालांकि, अभिनय का सफर भी उनके लिए आसान नहीं रहा।
खिलाड़ी के बाद चयनकर्ता की भूमिका
पेशेवर और निजी जीवन की कठिनाइयों के बीच अंकोला ने बाद में क्रिकेट से अपना रिश्ता फिर मजबूत किया। इस बार उनकी जिम्मेदारी मैदान पर गेंदबाजी करने की जगह खिलाड़ियों के चयन से जुड़ी थी।दिसंबर 2020 में वह मुंबई क्रिकेट संघ के मुख्य चयनकर्ता बने। इसके बाद बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति में भी शामिल रहे। इस तरह क्रिकेट से शुरू हुआ उनका सफर अभिनय की दुनिया से होकर दोबारा उसी खेल तक लौटा, जिसने उन्हें पहली पहचान दिलाई थी।












