
रांची : वरिष्ठ नागरिक कार्ड बनवाने और जीवित प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद का भरोसा देकर बैंक खातों से रकम निकालने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं, एक महिला ने अपनी अनुमति के बिना यूपीआई लेनदेन होने का आरोप लगाया है। रांची के इन तीन अलग-अलग मामलों में कुल 11 लाख 4 हजार 125 रुपये की ठगी अथवा अनधिकृत निकासी की शिकायत की गई है। कहीं बैंक अधिकारी बनकर ओटीपी लिया गया, तो कहीं निजी जानकारी हासिल करने के बाद खाते से रकम कटने लगी।
सोशल मीडिया पर दिखा कार्ड का पेज, फिर आया फोन
लालपुर थाना क्षेत्र के वर्द्धमान कंपाउंड स्थित कोयल एन्क्लेव निवासी एंड्रियास सोरेंग के अनुसार, फेसबुक देखते समय उन्हें वरिष्ठ नागरिक कार्ड से संबंधित एक पेज दिखाई दिया। उसमें कार्ड के लाभ बताए गए थे। पेज पर उपलब्ध नंबर से संपर्क करने के बाद उनके पास व्हाट्सएप पर ऑडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। कार्ड बनवाने के नाम पर बैंक खाते का विवरण और पता मांगा गया। एंड्रियास ने जानकारी साझा कर दी। बाद में मोबाइल पर आया ओटीपी भी उन्होंने कॉल करने वाले को बता दिया।
चार लेनदेन में निकल गए 4.11 लाख रुपये
शिकायत के मुताबिक, ओटीपी साझा करने के बाद खाते से चार बार में कुल 4 लाख 11 हजार 500 रुपये निकाले गए। इनमें पहले दो लाख, फिर दो बार एक-एक लाख और अंत में 11 हजार 500 रुपये की निकासी हुई। मोबाइल साइलेंट होने के कारण एंड्रियास तत्काल संदेश नहीं देख सके। बाद में एटीएम से रुपये निकालने का प्रयास असफल हुआ। बैंक में पासबुक अपडेट कराने पर उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली।
जीवित प्रमाणपत्र के नाम पर मांगी निजी जानकारी
दूसरा मामला सिलवई बस्ती में इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास रहने वाले अनूप लाल प्रसाद मंडल से जुड़ा है। उन्होंने साइबर अपराध थाना में शिकायत की है कि जीवित प्रमाणपत्र बनवाने के बहाने फोन पर उनकी निजी जानकारी हासिल की गई। उनके आवेदन के अनुसार, दो नंबरों से कॉल आए थे। इसके बाद खाते से रकम कटने लगी। उन्होंने कुल 3 लाख 91 हजार 625 रुपये की निकासी की शिकायत की है। मामले की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर भी दी गई है।
महिला ने यूपीआई भुगतान से किया इनकार
तीसरे मामले में कांके रोड के शास्त्री नगर निवासी रेखा मुखर्जी ने पंजाब नेशनल बैंक के अपने खाते से 3 लाख 1 हजार रुपये के अनधिकृत यूपीआई लेनदेन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने न ये भुगतान किए और न यूपीआई पिन डालकर किसी लेनदेन को मंजूरी दी। उन्होंने बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की है।
अनजान कॉल पर जानकारी साझा करने से बचें
इन मामलों के मद्देनजर ओटीपी, यूपीआई पिन और पासवर्ड गोपनीय रखना जरूरी है। कार्ड या प्रमाणपत्र बनवाने के लिए संबंधित विभाग की अधिकृत प्रक्रिया अपनाएं। संदिग्ध निकासी दिखे तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर शिकायत दर्ज कराएं।












