
- डोबो पुल के पास तेज हुई प्रसव पीड़ा, अस्पताल पहुंचने पर मदद के लिए भटकते रहे परिजन; नर्सों के पहुंचने पर संभली स्थिति
जमशेदपुर : सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आई घटना ने आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल पहुंचने के बाद भी एक गर्भवती महिला को करीब 20 मिनट तक टेंपो में ही दर्द से तड़पना पड़ा। इस दौरान उसके परिजन स्वास्थ्यकर्मियों की मदद के लिए इधर-उधर दौड़ते रहे। दो महीने के भीतर अस्पताल परिसर में टेंपो में प्रसव का यह दूसरा मामला बताया जा रहा है।
सोमवार को सोनारी के निर्मल नगर स्थित जाहिरा बस्ती की रहने वाली निर्मला कर्मकार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद उनके पति दुर्गा कर्मकार उन्हें टेंपो से एमजीएम अस्पताल लेकर जा रहे थे। रास्ते में डोबो पुल के पास अचानक प्रसव पीड़ा तेज हो गई। स्थिति ऐसी हो गई कि बच्ची का शरीर बाहर आने लगा। यह देखकर परिजन घबरा गए। उन्होंने टेंपो चालक को स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद चालक सावधानी से वाहन लेकर अस्पताल पहुंचा।
बच्ची का आधे से अधिक शरीर बाहर, फिर भी करना पड़ा इंतजार
परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक नवजात बच्ची का आधे से अधिक शरीर बाहर आ चुका था। इसके बावजूद प्रसूता को तत्काल टेंपो से निकालकर प्रसूति विभाग तक पहुंचाने में देरी हुई। महिला दर्द से कराहती रही और उसके परिजन मदद के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को खोजते रहे।
अस्पताल में प्रसूति विभाग तक पहुंचने का रास्ता पता लगाने में भी परिजनों को परेशानी हुई। काफी देर बाद सूचना मिलने पर चिकित्सकों ने तीन नर्सों को मौके पर भेजा। इसके बाद बच्ची को बाहर निकालकर प्रसूति विभाग में ले जाया गया। प्रसूता को व्हीलचेयर की मदद से अस्पताल के अंदर पहुंचाया गया।
चिकित्सकों के अनुसार, जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति सामान्य है। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पति बोले- पत्नी दर्द से तड़पती रही, मदद के लिए भटकते रहे
निर्मला के पति दुर्गा कर्मकार ने बताया कि वह अपनी पत्नी को जल्द से जल्द अस्पताल लेकर पहुंचे थे, ताकि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी काफी देर तक उन्हें टेंपो में ही इंतजार करना पड़ा। पत्नी दर्द से तड़प रही थी और वह उसे संभालने में लगे थे।
दुर्गा कर्मकार ने कहा कि अस्पताल आने वाला हर व्यक्ति वहां की व्यवस्था और विभिन्न विभागों की जानकारी से परिचित नहीं होता। ऐसे में जरूरत के समय मरीजों की मदद के लिए किसी कर्मचारी का सामने नहीं आना परेशानी बढ़ाने वाला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के मुख्य गेट पर होमगार्ड के जवान तैनात थे, लेकिन समय पर मदद नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई। उनका कहना था कि प्रसव जैसी आपात स्थिति में जच्चा-बच्चा को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए थी।
दो महीने में दूसरी घटना, व्यवस्था पर उठे सवाल
एमजीएम अस्पताल परिसर में इससे पहले भी टेंपो में बच्चे के जन्म का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में दोबारा हुई इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को अस्पताल पहुंचते ही कितनी जल्दी चिकित्सा सहायता मिलती है और आपात स्थिति में मरीजों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की क्या व्यवस्था है, यह चर्चा का विषय बन गया है।
वहीं, एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल नर्सों को मौके पर भेजा गया। इसके बाद जच्चा और बच्चा को प्रसूति विभाग में लाया गया। दोनों की स्थिति सामान्य है।












