
मुंबई : टाटा ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 में परोपकार से जुड़े विभिन्न कार्यों पर 1,556.31 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना और जरूरतमंद मरीजों को इलाज में सहायता प्रदान करना है।
ग्रामीण विकास पर सबसे ज्यादा खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में संस्थागत अनुदान और प्रत्यक्ष परियोजनाओं पर 1,353.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि व्यक्तिगत अनुदान के रूप में 202.99 करोड़ रुपये दिए गए। विभिन्न क्षेत्रों में ग्रामीण विकास के लिए सर्वाधिक 457.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा शिक्षा पर 270.26 करोड़, कैंसर उपचार पर 178.46 करोड़ और संस्थानों के विकास पर 169.31 करोड़ रुपये खर्च हुए।
स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा पर भी जोर
ट्रस्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं पर 105.97 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, जल एवं स्वच्छता के लिए 59.04 करोड़ और पोषण के लिए 57.64 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। व्यक्तिगत अनुदान में चिकित्सा सहायता का हिस्सा सबसे अधिक रहा। इसके तहत 143.30 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि शिक्षा के लिए 59.38 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई।
कैंसर के 1.06 लाख मरीजों को मिला परामर्श
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रस्ट के कैंसर उपचार कार्यक्रम के तहत 1,06,626 बाह्य रोगियों को परामर्श दिया गया। इस दौरान कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए और 29,638 मरीजों को विकिरण चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के तहत 13,031 नए मरीजों का पंजीकरण भी हुआ।
2026 से 2031 तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना
टाटा ट्रस्ट ने वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए स्वास्थ्य संबंधी रणनीति तैयार की है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत लगभग 25 लाख लोगों तक पहुंचने और 20 हजार से अधिक अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण देने की बात कही गई है।
स्थायी संस्थानों के निर्माण पर जोर
टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने कहा कि परोपकार का आकलन केवल खर्च की गई राशि या लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए बदलाव से भी किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्थानों की कार्यक्षमता, दक्षता और जवाबदेही को बेहतर बनाने पर जोर दिया।












