
नई दिल्ली : टाटा समूह की प्रमुख रिटेल कंपनी ट्रेंट लिमिटेड में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। कंपनी ने बहाराम वकील को नया चेयरमैन नियुक्त किया है। वह 12 नवंबर 2026 से पदभार संभालेंगे। वहीं, नोएल एन. टाटा 11 नवंबर को ट्रेंट के चेयरमैन और निदेशक पद से हट जाएंगे। इसके साथ ही कंपनी में उनका लगभग तीन दशक लंबा कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
टाटा समूह में इस समय नेतृत्व और बोर्ड स्तर पर बदलावों को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में ट्रेंट के नए चेयरमैन के रूप में बहाराम वकील की नियुक्ति को कंपनी के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रेंट के बोर्ड ने बहाराम वकील को नोएल टाटा का उत्तराधिकारी नियुक्त करने की मंजूरी दी है। कंपनी में यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब रिटेल कारोबार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां अपने बाजार विस्तार पर जोर दे रही हैं।
तीन दशक बाद ट्रेंट की कमान बदलेगी
नोएल एन. टाटा लंबे समय से ट्रेंट के नेतृत्व से जुड़े रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी ने रिटेल कारोबार में अपनी पहचान मजबूत की। अब उनकी जगह बहाराम वकील कंपनी के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
टाटा समूह की कंपनियों में नेतृत्व परिवर्तन के बीच ट्रेंट का यह फैसला कारोबारी जगत में खास महत्व रखता है। हालांकि, कंपनी की मौजूदा रणनीति में किस तरह के बदलाव होंगे, यह नए चेयरमैन के कार्यभार संभालने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कौन हैं बहाराम वकील?
बहाराम वकील देश के जाने-माने कॉरपोरेट वकीलों में शामिल हैं। वह लॉ फर्म ‘AZB एंड पार्टनर्स’ के सह-संस्थापक और सीनियर पार्टनर हैं। उन्हें रीस्ट्रक्चरिंग, इन्सॉल्वेंसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में अनुभव हासिल है।
उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ लॉज (LLM) की डिग्री प्राप्त की है। अपने कानूनी करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने मुंबई की लॉ फर्म लिटिल एंड कंपनी में भी काम किया था। इसके बाद वह अमेरिका की प्रमुख कानूनी फर्मों से जुड़े रहे।
मार्च 2026 से वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी काम कर रहे हैं। अब ट्रेंट के चेयरमैन की जिम्मेदारी मिलने के बाद टाटा समूह में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
टाटा समूह में बोर्ड स्तर पर भी बदलाव
ट्रेंट में चेयरमैन बदलने के साथ कंपनी के बोर्ड में अन्य नियुक्तियां भी की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शेयरधारकों की मंजूरी की शर्त पर राजीव दुबे को 30 अक्टूबर 2026 से अतिरिक्त गैर-कार्यकारी और गैर-स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा कल्पना मर्चेंट को भी तीन साल के कार्यकाल के लिए अतिरिक्त निदेशक और स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। इन नियुक्तियों से कंपनी के बोर्ड में बदलाव की तस्वीर सामने आती है।
अब ट्रेंट के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
बहाराम वकील के सामने कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा के बीच बाजार में अपनी स्थिति मजबूत रखने और भविष्य की विकास रणनीति को गति देने जैसी चुनौतियां होंगी।
रिटेल क्षेत्र में ग्राहकों की बदलती पसंद, ऑनलाइन खरीदारी का बढ़ता चलन और दूसरी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में नए चेयरमैन की भूमिका कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और कारोबारी प्राथमिकताओं के लिहाज से अहम होगी।
हालांकि, चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति से कंपनी की कारोबारी रणनीति में तत्काल बदलाव होगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
ट्रेंट टाटा समूह की प्रमुख रिटेल कंपनियों में शामिल है। ऐसे में इसके नेतृत्व में बदलाव का महत्व केवल एक पद पर नई नियुक्ति तक सीमित नहीं है। यह कंपनी के बोर्ड और भविष्य की रणनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
अब कारोबारी जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि बहाराम वकील के नेतृत्व में ट्रेंट अपनी विकास योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है और बदलते रिटेल बाजार में अपनी स्थिति को कैसे मजबूत करती है।












