
जामताड़ा : बीमार पिता का इलाज कराकर बेटा घर लौट रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद पिता की तबीयत में सुधार होगा, लेकिन रास्ते में हुए एक दर्दनाक हादसे ने दोनों की जिंदगी छीन ली। झारखंड के जामताड़ा जिले में नाला विधानसभा क्षेत्र के सियारकटिया गांव के पास बुधवार देर शाम सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाइक टकरा गई। हादसे में बाइक सवार पिता-पुत्र की मौत हो गई। मृतकों की पहचान संगाजोड़ी गांव निवासी सागर डोम (48) और उनके बेटे छोटन डोम (24) के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया। वहीं, आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे और सड़क सुरक्षा की मांग को लेकर करीब तीन घंटे तक सड़क जाम रखा।
अस्पताल से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, सागर डोम की तबीयत खराब थी। उनका बेटा छोटन बेहतर इलाज के लिए उन्हें नाला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया था। अस्पताल में डॉक्टर से इलाज कराने के बाद दोनों बाइक से अपने घर संगाजोड़ी लौट रहे थे।
इसी दौरान सियारकटिया गांव के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में पिता-पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई। एक साथ परिवार के दो सदस्यों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, तीन घंटे तक जाम रही सड़क
हादसे के बाद घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। पिता-पुत्र की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क किनारे खड़े वाहनों से होने वाले खतरे और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया।
सड़क जाम होने से मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब तीन घंटे तक आवागमन बाधित रहा। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर आश्वासन के बाद जाम हटाने की कोशिश की गई।
पूर्व मंत्री बाटुल झा भी पहुंचे
पिता-पुत्र की मौत और ग्रामीणों के विरोध की सूचना मिलने पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सत्यानंद झा ‘बाटुल’ भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने उनके सामने भी सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और सड़क किनारे खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग रखी।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने सड़क किनारे खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे वाहनों के लिए रिफ्लेक्टर और पर्याप्त चेतावनी संकेत होने जरूरी हैं, ताकि रात में वाहन चालकों को दूर से ही उनका पता चल सके।
फिलहाल, इस हादसे ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। पिता का इलाज कराकर घर लौट रहे बेटे को क्या पता था कि रास्ते में उसका और उसके पिता का सफर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।












