
जमशेदपुर : जमशेदपुर में जमीन या फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को अब रजिस्ट्री के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। झारखंड सरकार ने राज्य के नगर निकाय क्षेत्रों और अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन-मकान की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री फीस की कुल राशि पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाने का फैसला लिया है। इससे संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। खासकर उन इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है, जहां सरकारी सर्किल रेट बाजार में प्रचलित कीमत से अधिक बताया जा रहा है।
52 लाख के फ्लैट पर 36,400 रुपये अतिरिक्त खर्च का उदाहरण
रजिस्ट्री के खर्च को समझने के लिए 52 लाख रुपये के फ्लैट का उदाहरण लिया जा सकता है। यदि इस संपत्ति पर स्टांप ड्यूटी चार प्रतिशत और रजिस्ट्रेशन फीस तीन प्रतिशत की दर से कुल 3.64 लाख रुपये शुल्क बनता है, तो इस राशि का 10 प्रतिशत यानी 36,400 रुपये अतिरिक्त सरचार्ज होगा। इस तरह कुल रजिस्ट्री संबंधी शुल्क 4 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, यह गणना संबंधित समाचार में दिए गए उदाहरण पर आधारित है। वास्तविक शुल्क संपत्ति के मूल्यांकन, लागू दरों और सरकारी आदेश की शर्तों के अनुसार अलग हो सकता है।
सर्किल रेट और बाजार भाव में अंतर से बढ़ेगी परेशानी
जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों में सरकारी सर्किल रेट और बाजार में प्रचलित संपत्ति की कीमतों के बीच अंतर का मुद्दा भी सामने आया है। समाचार में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, बिष्टुपुर और साकची में संपत्ति का बाजार भाव 5,500 से 7,000 रुपये प्रति वर्गफुट बताया गया है, जबकि सरकारी सर्किल रेट 8,092 रुपये से 9,711 रुपये प्रति वर्गफुट तक है।
इसी तरह मानगो में बाजार भाव 3,500 से 4,000 रुपये प्रति वर्गफुट बताया गया है, जबकि सर्किल रेट 4,539 रुपये है। सोनारी और कदमा में बाजार भाव 4,000 से 4,500 रुपये प्रति वर्गफुट के आसपास बताया गया है, जबकि सरकारी दर 6,061 रुपये तक है।
ऐसे में सर्किल रेट के आधार पर शुल्क निर्धारित होने की स्थिति में खरीदारों को पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि, इन दरों की वर्तमान सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक बाजार भाव से पुष्टि जरूरी है।
रियल एस्टेट कारोबारियों ने जताई चिंता
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि कौशल किशोर सिंह के मुताबिक, रियल एस्टेट कारोबार पहले से मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में रजिस्ट्री से जुड़े शुल्क पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाने से कारोबार पर और दबाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि संपत्ति खरीदने वालों को राहत मिल सके और कारोबार प्रभावित न हो।
सरकार के फैसले पर उठ रहे सवाल
अतिरिक्त सरचार्ज से सरकार को राजस्व मिलने की संभावना है, लेकिन इसका असर जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री पर भी पड़ सकता है। खरीदारों को संपत्ति की कीमत के अलावा रजिस्ट्री के लिए अधिक रकम जुटानी होगी। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।












