
रांची : झारखंड में लंबे समय से अनुपस्थित रहने और नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देने के आरोप में 631 डॉक्टरों को सेवामुक्त करने की तैयारी के बीच नया विवाद सामने आया है। सूची में शामिल करीब आधे चिकित्सकों का दावा है कि वे स्वास्थ्य विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि अंतिम कार्रवाई से पहले विभागीय दस्तावेजों का सत्यापन होना चाहिए, ताकि अनुमति लेकर पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों पर गलत कार्रवाई न हो।
अनुमति लेकर पढ़ाई, फिर अनुपस्थित कैसे?
संबंधित डॉक्टरों के अनुसार, कई चिकित्सक पीजी, सुपर स्पेशियलिटी और सीनियर रेजिडेंसी पाठ्यक्रमों से जुड़े हैं। कुछ ने अध्ययन अवकाश लिया है, जबकि अन्य विभागीय अनुमति के आधार पर आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। इन चिकित्सकों का सवाल है कि जब विभाग ने ही पढ़ाई की अनुमति दी है, तो उन्हें बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वालों की श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड का सही मिलान किए बिना कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस्तीफे और दोबारा योगदान के दावे भी
डॉक्टरों ने नियुक्ति, योगदान, इस्तीफे, अध्ययन अवकाश, एनओसी और वर्तमान कार्यस्थिति से जुड़े दस्तावेजों की जाँच की माँग की है। कुछ चिकित्सकों का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे निर्धारित अस्पताल में योगदान दे चुके हैं, फिर भी सूची में उनका नाम बना हुआ है। डॉ. पूजा झा ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2020 में हुई थी और उन्होंने उसी वर्ष इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल वे दिल्ली में डीएनबी एनेस्थीसिया की पढ़ाई कर रही हैं। उनके मुताबिक, उनके मामले में पुराने विभागीय रिकॉर्ड की जाँच जरूरी है।
अध्ययन अवकाश से लौटे डॉक्टर का नाम भी शामिल
डॉ. अनुपम डुंगडुंग के अनुसार, उनकी नियुक्ति दिसंबर 2021 में हुई थी। वे तीन वर्ष के अध्ययन अवकाश पर थे और 23 अक्टूबर 2026 को गिरिडीह सदर अस्पताल में योगदान दे चुके हैं। इसके बावजूद अनुपस्थित डॉक्टरों की सूची में उनका नाम होने की बात सामने आई है।वहीं, डॉ. किसलय अंकिता टुडू ने बताया कि उनकी तैनाती बलियापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में थी और वर्तमान में वे रिम्स के ईएनटी विभाग में जूनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यरत हैं।
वास्तविक अनुपस्थिति पर कार्रवाई का समर्थन
चिकित्सकों का कहना है कि बिना अनुमति लंबे समय से ड्यूटी से दूर रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई उचित है। लेकिन वैध एनओसी या अध्ययन अवकाश वाले मामलों में अलग-अलग दस्तावेज देखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
पहले 143 डॉक्टरों की समाप्त हो चुकी है सेवा
रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2025 में योगदान नहीं देने वाले 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर चुका है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का कहना है कि डॉक्टरों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। जो सामने नहीं आए हैं, उन्हें हटाकर नए चिकित्सकों की बहाली की जाएगी।












