
रांची : झारखंड में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना भुगतान और तकनीकी अड़चनों में उलझ गई है। करीब 235 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत कई जगह काम आगे बढ़ने के बावजूद लोगों को जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भुगतान नहीं मिलने से काम करने वाली एजेंसियों की गतिविधियां प्रभावित हैं और घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य अधूरा है।प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र की ओर से करीब 65 करोड़ रुपये की राशि रोके जाने के कारण 40 से अधिक एजेंसियों का भुगतान प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, एजेंसी प्रतिनिधियों ने स्कीम आईडी नहीं बनने को भी भुगतान में देरी की प्रमुख वजह बताया है।
321 योजनाओं को मिली थी मंजूरी
राज्य में इन समुदायों की बस्तियों तक पेयजल पहुंचाने के लिए वर्ष 2024–25 और 2025–26 में कुल 321 योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी। इन पर लगभग 235 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। योजना में राज्य सरकार का अंशदान करीब 30 प्रतिशत बताया गया है। इस पहल का उद्देश्य बस्तियों के आसपास क्लस्टर बनाकर उपलब्ध जलस्रोतों के माध्यम से परिवारों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना है। लेकिन मंजूरी और निर्माण के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं होने से लाभार्थियों का इंतजार बना हुआ है।
स्कीम आईडी नहीं बन रही, अटक रहे बिल
योजना से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि संबंधित कार्यों की स्कीम आईडी तैयार नहीं हो पा रही है। इसके बिना वे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पोर्टल पर किए गए काम का विवरण अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। काम की जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं होने से भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। प्रतिनिधियों के अनुसार, इस समस्या को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर कई बार कार्रवाई का आग्रह किया गया है। ऐसे में धनराशि के साथ पोर्टल से जुड़ी अड़चन भी परियोजना की गति रोक रही है।
कहीं 60 प्रतिशत काम, फिर भी अधूरा लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, कई योजनाओं में लगभग 60 प्रतिशत तक काम हो चुका है। वहीं, कुछ स्थानों पर निर्माण पूरा होने के बाद भी एजेंसियों का काम बंद रहने से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे स्पष्ट है कि केवल निर्माण की प्रगति ही पर्याप्त नहीं है; जलापूर्ति शुरू होना भी जरूरी है। राज्य में संबंधित जनजातीय समुदायों की आबादी करीब तीन लाख बताई गई है। इन्हीं परिवारों को ध्यान में रखकर जलापूर्ति की व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
अब भुगतान और तकनीकी समाधान पर नजर
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लंबित भुगतान, स्कीम आईडी और पोर्टल पर कार्य विवरण दर्ज करने की समस्याओं का समाधान अहम है। एजेंसियों का काम दोबारा गति पकड़ने और पूरी हो चुकी व्यवस्थाओं से आपूर्ति शुरू होने पर ही परिवारों तक योजना का वास्तविक लाभ पहुंच सकेगा। फिलहाल, लोगों की जरूरत और स्वीकृत योजना के बीच प्रशासनिक व तकनीकी अड़चनें बनी हुई हैं।












