
- बांग्लादेश से झारखंड पहुंचे विनय दास बाबाजी ने रंकिणी मंदिर को बनाया अपना ठिकाना, सादा भोजन और नियमित दिनचर्या को बताते हैं लंबी उम्र का आधार; 30 नवंबर को मनाया जाएगा जन्मोत्सव।
गालूडीह : उम्र के 110 पड़ाव पार करने के बाद भी अगर कोई व्यक्ति सामान्य दिनचर्या में सक्रिय रहे, तो लोगों की जिज्ञासा बढ़ना स्वाभाविक है। गालूडीह स्थित प्राचीन रंकिणी मंदिर के पुजारी सह संन्यासी विनय दास बाबाजी की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है। 110 वर्ष की उम्र में उनकी जीवनशैली और मंदिर के प्रति समर्पण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बाबाजी के जीवन से जुड़ी कहानी में आस्था, सादगी और वर्षों की साधना के कई पहलू सामने आते हैं।
सादा भोजन और नियमित दिनचर्या पर जोर
बाबाजी की लंबी उम्र के पीछे उनकी सादा जीवनशैली को अहम माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह सादा भोजन करते हैं, कम आहार लेते हैं और नियमित रूप से चलते-फिरते हैं। उनकी जीवनशैली लोगों को आकर्षित करती है। हालांकि, उनकी लंबी उम्र का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच के बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता।
बांग्लादेश से गालूडीह तक का सफर
विनय दास बाबाजी मूल रूप से बांग्लादेश के श्रीहट्ट जिले के निवासी बताए जाते हैं। करीब 30-31 वर्ष की उम्र में वह घर से निकल गए थे। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा स्थित एक आश्रम में बिताया। बाद में जमशेदपुर आने के दौरान वह गालूडीह स्टेशन पर उतरे। यहीं से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
जंगल-झाड़ियों के बीच स्थित मंदिर में शुरू की सेवा
बताया जाता है कि उस समय रंकिणी मंदिर के आसपास जंगल और झाड़ियां थीं। मंदिर भी बंद पड़ा था। ऐसे में बाबाजी ने मंदिर परिसर की साफ-सफाई और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। धीरे-धीरे मंदिर से उनका जुड़ाव गहरा होता गया। इसके बाद उन्होंने इसी स्थान को अपना ठिकाना बना लिया और मंदिर की सेवा में जुट गए।
दशकों से मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे बाबाजी
वर्षों से रंकिणी मंदिर में पूजा-अर्चना और सेवा से जुड़े रहने के कारण विनय दास बाबाजी की जिंदगी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखती है। उनका जीवन धार्मिक आस्था और सादगी से जुड़ा रहा है। अब 110 वर्ष की उम्र में उनके जन्मोत्सव को लेकर भी मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
30 नवंबर को मनाया जाएगा जन्मोत्सव
मिली जानकारी के अनुसार, 30 नवंबर 2026 को विनय दास बाबाजी के 111वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस मौके पर मंदिर परिसर को सजाया जाएगा और विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। 29 नवंबर की शाम से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाएगा।
1500 दीपकों से जगमगाएगा मंदिर परिसर
बाबाजी के सम्मान में रंकिणी मंदिर परिसर में 1500 दीपक जलाने की तैयारी है। इसके अलावा हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और गुरु के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण भी होगा। बाबाजी से गुरु दीक्षा लेने वाले उनके शिष्य भी इस अवसर पर मंदिर पहुंचेंगे।
आस्था, सादगी और सेवा की कहानी
विनय दास बाबाजी की जिंदगी केवल उनकी उम्र के कारण चर्चा में नहीं है, बल्कि मंदिर के प्रति उनके लंबे जुड़ाव और सादगी भरे जीवन के कारण भी लोगों का ध्यान खींचती है। दशकों से एक ही स्थान पर रहकर पूजा-अर्चना करना और मंदिर की सेवा में समय बिताना उनके जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है। 30 नवंबर को होने वाला जन्मोत्सव इसी लंबे जीवन सफर और धार्मिक समर्पण का उत्सव होगा।












