
- कर्नाटक सरकार के फैसले से दूध की कीमतों पर चर्चा तेज, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त भुगतान; झारखंड के उपभोक्ताओं की नजर अब स्थानीय बाजार पर
बेंगलुरु/जमशेदपुर : दूध की कीमतों को लेकर कर्नाटक सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने दूध की कीमत में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरें 1 नवंबर से लागू करने की घोषणा की गई है। इस फैसले के बाद अब झारखंड के उपभोक्ताओं के बीच भी सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में यहां भी दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं?
कर्नाटक सरकार के अनुसार, कीमत में होने वाली कुल 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी में से 7 रुपये दूध उत्पादक किसानों को मिलेंगे, जबकि 1 रुपये सहकारी समितियों को दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से दूध उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कर्नाटक के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि झारखंड में भी दूध के दाम अपने आप बढ़ जाएंगे। राज्य में कीमतों में किसी बदलाव के लिए संबंधित डेयरी संस्था या सक्षम प्राधिकरण के फैसले की पुष्टि जरूरी होगी।
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे क्या है वजह?
दुग्ध उत्पादकों की ओर से लंबे समय से दूध की खरीद दर बढ़ाने की मांग की जा रही थी। पशुओं के चारे, दवाइयों, परिवहन और रखरखाव पर होने वाला खर्च बढ़ने के कारण किसानों की लागत में इजाफा हुआ है।
कर्नाटक में दुग्ध उत्पादकों ने खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। किसानों और दुग्ध सहकारी समितियों की मांगों पर विचार करने के बाद कैबिनेट ने 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
किसानों को अब कितने रुपये मिलेंगे?
कर्नाटक के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के मुताबिक, अभी किसानों को दूध के लिए लगभग 35 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। नई व्यवस्था में यह राशि बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।
इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से किसानों को मिलने वाली 5 रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि जारी रहेगी। इस तरह सरकारी प्रोत्साहन सहित किसानों को कुल 47 रुपये प्रति लीटर मिल सकेंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसानों को मिलने वाला भुगतान और ग्राहकों के लिए निर्धारित खुदरा बिक्री मूल्य अलग-अलग होते हैं। इसलिए खरीद मूल्य में बढ़ोतरी का पूरा असर किस रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, यह संबंधित व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
क्या झारखंड में भी बढ़ेंगे दूध के दाम?
कर्नाटक के फैसले के बाद झारखंड में दूध की कीमतों को लेकर चर्चा जरूर हो सकती है, लेकिन फिलहाल इस फैसले के आधार पर राज्य में कीमत बढ़ने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
झारखंड में दूध की खरीद और बिक्री की दरें संबंधित डेयरी संस्था, दूध की किस्म और लागू मूल्य सूची के अनुसार निर्धारित होती हैं। इसलिए राज्य में किसी संभावित बढ़ोतरी का आकलन करने के लिए स्थानीय डेयरी संस्थाओं के रुख और आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी होगी।
जमशेदपुर में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी यही सवाल अहम है। क्या दूध उत्पादकों को बेहतर भुगतान देने के लिए स्थानीय स्तर पर खरीद दरों में बदलाव की मांग उठेगी? क्या इसका असर पैकेट वाले दूध की कीमतों पर पड़ेगा? इन सवालों का जवाब स्थानीय डेयरी संस्थाओं के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
आम आदमी की जेब पर क्या पड़ सकता है असर?
दूध रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है। घरों में चाय, नाश्ते और बच्चों के खानपान से लेकर मिठाई की दुकानों, होटल और चाय की दुकानों तक इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
अगर भविष्य में झारखंड में भी दूध की खुदरा कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर घरेलू बजट के साथ-साथ दूध से बने उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल कर्नाटक के फैसले के कारण झारखंड में दूध महंगा होने की पुष्टि नहीं हुई है।
अब स्थानीय डेयरी संस्थाओं के रुख पर नजर
कर्नाटक सरकार ने किसानों को बेहतर भुगतान देने के उद्देश्य से कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब झारखंड में दुग्ध उत्पादकों की खरीद दर, स्थानीय बाजार की स्थिति और डेयरी संस्थाओं के अगले कदम पर नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानों को राहत देने के लिए झारखंड में भी दूध की खरीद दर बढ़ाने की मांग जोर पकड़ेगी या उपभोक्ताओं को फिलहाल मौजूदा कीमतों पर ही दूध मिलता रहेगा?












