
जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े 12 प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इनमें कैंसर, मधुमेह, मोटापा, कुष्ठ रोग, सोरायसिस और आंखों के फंगल संक्रमण जैसे विषय शामिल रहे। बैठक में तीन प्रस्तावों को सीधे अनुशंसित किया गया, जबकि चार को आवश्यक सुधारों के साथ आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई। पांच प्रस्ताव खारिज कर दिए गए। समीक्षा के दौरान शोध के विषयों और उनकी अध्ययन पद्धति पर चर्चा हुई। अलग-अलग बीमारियों से जुड़े इन प्रस्तावों के जरिए जांच और उपचार से संबंधित सवालों का अध्ययन करने की तैयारी है।
स्तन कैंसर के संकेतकों पर होगा अध्ययन
स्तन कैंसर से संबंधित प्रस्ताव में तीन माइक्रोआरएनए संकेतकों का अध्ययन शामिल है। शोध के माध्यम से बीमारी से इनके संबंध को समझने का प्रयास किया जाएगा। यह अध्ययन कैंसर की पहचान से जुड़े वैज्ञानिक सवालों पर केंद्रित रहेगा। हालांकि, प्रस्ताव की समीक्षा को किसी नई जांच या उपचार की सफलता के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसकी उपयोगिता शोध के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मधुमेह में नई फॉर्मूला दवा की भूमिका पर चर्चा
टाइप-2 मधुमेह से जुड़े प्रस्ताव में मेटफॉर्मिन के साथ एक नई फॉर्मूला दवा के उपयोग का अध्ययन शामिल है। इसके माध्यम से उपचार में उसकी संभावित भूमिका का आकलन किया जाएगा। बैठक में इस विषय को अन्य शोध प्रस्तावों के साथ समीक्षा के लिए रखा गया। अध्ययन पूरा होने के बाद ही इसके परिणाम और उपयोगिता के बारे में निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
मोटापे और कुष्ठ रोग से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल
मोटापे से संबंधित शोध प्रस्ताव में 50 से 70 वर्ष के मोटापाग्रस्त पुरुषों में विशेष कमर बेल्ट के इस्तेमाल का अध्ययन शामिल है। इसमें बेल्ट की संभावित उपयोगिता का आकलन किया जाना है। इसके अलावा, कुष्ठ रोग के कारण नसों को होने वाली क्षति से संबंधित प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। सोरायसिस और उससे जुड़े जोड़ों के गठिया का विषय भी बैठक में शामिल रहा। इन प्रस्तावों में संबंधित बीमारियों के अलग-अलग पहलुओं को समझने पर ध्यान दिया गया है।
आंखों के फंगल संक्रमण पर भी शोध की तैयारी
आंखों में होने वाले फंगल संक्रमण से जुड़े अध्ययन प्रस्ताव की भी समीक्षा हुई। बैठक में विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत प्रस्तावों को परखने के बाद उन्हें सीधे आगे बढ़ाने, संशोधन कराने अथवा खारिज करने का निर्णय लिया गया। बैठक में चेयरमैन डॉ. शांतनु सेन, को-चेयरमैन डॉ. देवाशीष दास और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर की डॉ. अपर्णा मुखर्जी शामिल रहीं। उद्घाटन के अवसर पर प्राचार्य डॉ. संजय कुमार, अधीक्षक डॉ. बलराम झा और डॉ. आशीष विश्वास उपस्थित थे।












