
- पेयजल योजना के उपकरणों की खरीद और गुणवत्ता पर उठे सवाल, शिकायत के बाद संयुक्त जांच टीम पहुंची प्लांट; निष्पक्ष जांच नहीं होने पर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
जमशेदपुर : जमशेदपुर के जुगसलाई स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में यांत्रिक उपकरणों की आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 22 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए उपकरणों में अनियमितता का आरोप लगा है। शिकायत के बाद बुधवार को संयुक्त जांच टीम ने प्लांट पहुंचकर मामले की पड़ताल की। जांच में अब क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्लांट में लगाए गए उपकरणों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कुछ उपकरणों की स्थापना नहीं होने और लगाए गए उपकरणों में तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने का भी दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद पेयजल व्यवस्था से जुड़े उपकरणों की खरीद और उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
तांबे की जगह लोहे की अर्थिंग लगाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जहां तांबे की अर्थिंग होनी चाहिए थी, वहां सस्ते लोहे का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा निर्धारित क्षमता के स्टार्टर के स्थान पर कम क्षमता वाली कंपनी का स्टार्टर लगाए जाने का भी दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, ट्रांसफार्मर में सुरक्षा मानकों के अनुरूप तेल नहीं डाला गया। इन आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
संयुक्त टीम ने प्लांट पहुंचकर की जांच
शिकायत के बाद गठित संयुक्त जांच टीम बुधवार को जुगसलाई के एमई स्कूल रोड स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंची। टीम में जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संदीप पासवान और पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक सहाय शामिल थे। टीम ने प्लांट से जुड़े मामले की जांच की। जांच में किन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया और अनियमितता की पुष्टि हुई या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।
एक साल पहले की गई थी शिकायत
इस मामले को लेकर जुगसलाई के अधिवक्ता अमर कुमार तिवारी ने करीब एक वर्ष पहले तत्कालीन पेयजल मंत्री और उपायुक्त से लिखित शिकायत की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच टीम के पहुंचने से पहले उन्हें इसकी सूचना नहीं दी गई और दोषी ठेकेदार को बचाने की कोशिश की जा रही है।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
अधिवक्ता अमर कुमार तिवारी ने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई या लीपापोती का प्रयास किया गया, तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना और गुणवत्ता में निर्धारित मानकों का पालन किया गया या नहीं।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
करीब 22 लाख रुपये के उपकरणों से जुड़े इस मामले में अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका और आगे की कार्रवाई पर सवाल उठेंगे। हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।












