
रांची : झारखंड में टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण, राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। वाणिज्य-कर विभाग की CT-MIS परियोजना के तहत नए सिस्टम इंटीग्रेटर Choice Consultancy Services Private Limited के साथ एकरारनामा संपन्न हुआ है। गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में यह समझौता हुआ।
इस परियोजना के तहत Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) विकसित किया जाएगा। इसके जरिए विभिन्न सरकारी विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस को एकीकृत कर संभावित टैक्स चोरी, राजस्व की हानि और कर अपवंचन की पहचान की जाएगी। सरकार का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से राजस्व व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और मजबूत बनाना है।
छह महीने में तैयार होगा IRIS, तीन साल तक चलेगा क्रियान्वयन
वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार ने परियोजना की तकनीकी कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि नए सिस्टम इंटीग्रेटर की मदद से IRIS प्रणाली का विकास छह महीने के भीतर किया जाएगा। इसके बाद आगामी तीन वर्षों तक इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।
इस सिस्टम में Business Intelligence (BI) और Artificial Intelligence (AI) आधारित टूल्स का इस्तेमाल होगा। विभिन्न विभागों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित कर अपवंचन और राजस्व ह्रास की पहचान की जा सकेगी। सिस्टम से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभाग नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।
इस पहल से राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने, विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और राजस्व के नुकसान पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
22 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा, वित्त मंत्री ने बताई वजह
वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनिजों के दोहन के कारण प्रदूषण, वन क्षेत्र और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा खनिजों के परिवहन से राज्य की सड़कों को भी नुकसान पहुंचता है।
मंत्री के अनुसार, इन प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई राज्य सरकार को अपने संसाधनों से करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि राज्य को हो रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए अपने राजस्व संग्रहण की क्षमता बढ़ाना आवश्यक है।
MMDR एक्ट से 14 हजार करोड़, GST और मनरेगा से चार-चार हजार करोड़ के नुकसान का दावा
वित्त मंत्री ने आर्थिक क्षति का ब्योरा देते हुए कहा कि MMDR एक्ट के कारण झारखंड को लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, GST सुधार और मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण राज्य को लगभग चार-चार हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में राज्य को अपने स्तर पर राजस्व संग्रहण बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा। वाणिज्य-कर विभाग ने इस दिशा में आवश्यक तैयारियां की हैं और IRIS परियोजना उसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के अनुरूप राज्य में राजस्व सृजन की संभावनाओं को विकसित करने के लिए यह पहल की गई है। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रहण करने वाले विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर राज्य की आय बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने इस एकरारनामे को झारखंड के राजस्व तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए इसे राज्य के इतिहास का स्वर्णिम दिन करार दिया। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और वाणिज्य-कर विभाग की ओर से इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
GSTN से लेकर जमीन रजिस्ट्री तक, कई विभागों के पोर्टल होंगे एकीकृत
IRIS प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल के बीच API Integration किया जाएगा। इसके तहत निम्नलिखित पोर्टल को एकीकृत करने का प्रस्ताव है।
1. GSTN API के साथ खान एवं भूतत्व विभाग के JIMMS पोर्टल का एकीकरण।
2. परिवहन विभाग के VAHAN पोर्टल का एकीकरण।
3. कार्य विभागों एवं आईटी विभाग के WAMIS पोर्टल का एकीकरण।
4. राजस्व विभाग के भूमि पंजीकरण पोर्टल का एकीकरण।
5. नगर विकास विभाग के Property Tax पोर्टल का एकीकरण।
6. श्रम विभाग के Labour Cess पोर्टल का एकीकरण।
7. VAT पोर्टल के साथ परिवहन विभाग के VAHAN पोर्टल और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व पोर्टल का एकीकरण।
8. JPT पोर्टल के साथ नगर विकास विभाग के ट्रेड लाइसेंस पोर्टल का एकीकरण।
9. JED पोर्टल के साथ ऊर्जा विभाग के बिजली बिल पोर्टल का एकीकरण।
इन पोर्टलों के बीच डेटा साझा होने से राजस्व से संबंधित सूचनाओं का समेकित विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे विभिन्न विभागों के रिकॉर्ड के आधार पर संभावित गड़बड़ियों और कर अपवंचन की पहचान करने में सहायता मिलेगी।
डेटा विश्लेषण से होगी निगरानी, संबंधित विभाग करेंगे कार्रवाई
Choice Consultancy Services Private Limited के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित IRIS प्रणाली की कार्यप्रणाली, तकनीकी संरचना और क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के डेटाबेस और ऑनलाइन पोर्टल के एकीकरण से राजस्व संबंधी सूचनाओं का समेकित विश्लेषण संभव होगा। इसके आधार पर संभावित कर अपवंचन और राजस्व ह्रास की पहचान की जा सकेगी। संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से नियमानुसार कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी।
निविदा के माध्यम से हुआ नए सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन
CT-MIS परियोजना के अंतर्गत नए सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। इसके बाद वाणिज्य-कर विभाग और Choice Consultancy Services Private Limited के बीच एकरारनामा संपन्न हुआ।
राज्य सरकार का उद्देश्य तकनीक आधारित राजस्व प्रशासन विकसित करना है, ताकि राजस्व संग्रहण की क्षमता बढ़ाई जा सके और सरकारी राजस्व के नुकसान पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके।
कार्यक्रम में संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित वाणिज्य-कर विभाग के अन्य पदाधिकारी और कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
क्या बदलेगा नई व्यवस्था से?
IRIS प्रणाली लागू होने के बाद विभिन्न विभागों के राजस्व संबंधी आंकड़ों का एकीकृत विश्लेषण संभव होगा। इससे संभावित कर चोरी की पहचान, राजस्व ह्रास की निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, इस परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छह महीने में सिस्टम किस तरह विकसित होता है, विभिन्न विभागों के पोर्टल का एकीकरण कितना प्रभावी रहता है और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर राजस्व संबंधी मामलों में कितनी समयबद्ध कार्रवाई होती है।












