
रांची : शिक्षक बनने का सपना उम्र की सीमाओं से आगे निकलता दिखा। करीब दस वर्ष बाद आयोजित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में रविवार को युवाओं के साथ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हुए, जो लंबे समय से इस अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। परीक्षा केंद्रों पर कहीं पिता-पुत्र साथ पहुंचे, तो कहीं भाई-बहन और भाभी-देवर ने एक ही दिन अपनी तैयारी की परीक्षा दी। परिवार के सदस्यों की इस भागीदारी ने परीक्षा के माहौल को खास बना दिया।
55–56 वर्ष की उम्र में भी कायम उम्मीद
रांची के सेंट्रल एकेडमी बरियातू, संत माइकल स्कूल इटकी और सर्कुलर रोड स्थित महेंद्र प्रताप इंटर कॉलेज सहित विभिन्न केंद्रों पर अलग-अलग आयु वर्ग के परीक्षार्थी नजर आए। इनमें 55 और 56 वर्ष के अभ्यर्थी भी थे। किसी ने पहली बार परीक्षा दी, तो कोई वर्षों की तैयारी और अनुभव के साथ पहुंचा। परिजन एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते दिखे। लंबे अंतराल के बाद मिले अवसर ने पुरानी उम्मीदों को फिर ताकत दी।
नए प्रारूप ने उलझाया, कुरमाली में हुई परेशानी
परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। कुछ ने प्रश्नों को सामान्य और सहज बताया, जबकि अन्य को बदले हुए प्रारूप के कारण सवाल समझने में समय लगा। अभ्यर्थी शिखा कुमारी के अनुसार, उच्च प्राथमिक स्तर का प्रश्नपत्र सामान्य था, लेकिन कुरमाली के प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन लगे। इसमें व्याकरण आधारित सवाल अधिक थे। दूसरे परीक्षार्थियों ने भी कुरमाली में कठिनाई की बात कही। हालांकि, अन्य विषयों को लेकर कई अभ्यर्थी संतुष्ट दिखे। झारखंड से संबंधित सामान्य जानकारी और मुंडारी भाषा के प्रश्न भी पूछे गए। केंद्रों के बाहर प्रश्नों और संभावित उत्तरों पर चर्चा चलती रही।
986 केंद्रों पर हुई परीक्षा, उपस्थिति 85.74 प्रतिशत
भेजी गई रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सभी 24 जिलों में 986 केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा आयोजित हुई। दोनों पालियों को मिलाकर 5,65,916 पंजीकरण के मुकाबले 4,85,243 अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज हुई। कुल 80,673 अनुपस्थित रहे और उपस्थिति 85.74 प्रतिशत रही। पहली पाली में कक्षा छह से आठ के उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा हुई। इसके लिए पंजीकृत 3,69,705 अभ्यर्थियों में 3,13,098 शामिल हुए, जबकि 56,607 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली में कक्षा एक से पांच के प्राथमिक स्तर के लिए पंजीकृत 1,96,211 अभ्यर्थियों में 1,72,145 उपस्थित हुए और 24,066 अनुपस्थित रहे।
अब परिणाम का इंतजार
रामगढ़ की अभ्यर्थी मसूरिया खातून ने बीएड अभ्यर्थियों को परीक्षा में अवसर मिलने को सकारात्मक पहल बताया। वहीं, पुरुलिया की सुलेखा ने प्रश्नपत्र को सहज बताते हुए सफलता की उम्मीद जताई। रांची में 101 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा समाप्त होने के बाद अब अभ्यर्थियों की निगाहें परिणाम और आगे की प्रक्रिया पर हैं। लंबे इंतजार के बाद मिले इस मौके से शिक्षक बनने की उनकी उम्मीदें जुड़ी हैं।












