
- तीन गुटों में बंटे पार्षद, वर्चस्व और श्रेय लेने की लड़ाई में 40 से अधिक योजनाओं के टेंडर रद्द
- मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद एकता मंच के बीच बढ़ी खींचतान, सड़क-नाली से लेकर सफाई और पेयजल तक की समस्याएं हाशिये पर
जमशेदपुर : मानगो नगर निगम में विकास की रफ्तार पर सियासी खींचतान भारी पड़ने लगी है। निगम के भीतर वर्चस्व और श्रेय लेने की लड़ाई ऐसी गहराई है कि इसका सीधा असर अब विकास योजनाओं पर दिखने लगा है। मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद एकता मंच के रूप में पार्षद तीन अलग-अलग गुटों में बंट चुके हैं। नतीजा यह है कि करीब 12 करोड़ रुपये की 40 से अधिक विकास योजनाओं के टेंडर रद्द हो चुके हैं। इससे सड़क, नाली और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। जिन योजनाओं से आम लोगों को राहत मिलनी थी, वे आपसी खींचतान की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं।
निगम में इन दिनों हर योजना को लेकर सहमति बनाने के बजाय उसका श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा अधिक दिखाई दे रही है। किस वार्ड में पहले काम होगा, किस योजना को प्राथमिकता मिलेगी और विकास कार्यों का शिलान्यास या उद्घाटन किसके नाम से होगा, इन सवालों पर गुटों के बीच तनातनी बनी हुई है। इसका असर प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों के सामने भी यह चुनौती है कि अलग-अलग गुटों के दबाव के बीच योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
तीन गुटों में बंटी निगम की राजनीति
मानगो नगर निगम में मेयर सुधा गुप्ता, डिप्टी मेयर राहुल कश्यप और वार्ड पार्षद एकता मंच के अध्यक्ष राजेश सिंह के नेतृत्व में अलग-अलग समूह सक्रिय हैं। मेयर खेमा बोर्ड में अपना प्रभाव और नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश में है। वहीं, डिप्टी मेयर अपने समर्थक पार्षदों के साथ अलग राजनीतिक ताकत के रूप में सक्रिय हैं। दूसरी ओर, राजेश सिंह के नेतृत्व में 12 वार्ड पार्षदों का एकता मंच निगम के भीतर अपनी मांगों को लेकर दबाव बना रहा है।
इस खींचतान के पीछे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। विधायक सरयू राय की टीम निगम के मामलों पर अपनी नजर बनाए हुए है, जबकि पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की टीम भी क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में निगम की स्थानीय राजनीति में बड़े नेताओं के प्रभाव की चर्चा भी तेज है।
योजनाओं के चयन से लेकर श्रेय तक पर विवाद
तीनों गुटों के बीच मतभेद के प्रमुख कारणों में विकास योजनाओं का चयन, बजट आवंटन और राजनीतिक श्रेय शामिल हैं। पार्षदों का आरोप है कि वार्डों की जरूरतों के अनुसार योजनाओं को प्राथमिकता नहीं मिल रही है। वहीं, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति जैसी योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन में भी श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
पार्षद एकता मंच का आरोप है कि पिछले आठ-नौ महीनों में केवल दो अधूरी बोर्ड बैठकें हुई हैं। पार्षद जब जनता की समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं, तो उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। इससे वार्डों की बुनियादी समस्याओं का समाधान प्रभावित हो रहा है।
जनता के सामने पानी, कचरा और जलजमाव की चुनौती
निगम की अंदरूनी खींचतान के बीच मानगो के कई इलाकों में पेयजल, सफाई, कचरा संग्रहण, जलजमाव और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। पार्षदों की प्राथमिकता जहां निगम में अपनी राजनीतिक ताकत और प्रभाव कायम रखने पर केंद्रित दिखाई दे रही है, वहीं आम नागरिकों को रोजमर्रा की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। 12 करोड़ की योजनाओं के टेंडर रद्द होने से विकास कार्यों में देरी का मुद्दा और गंभीर हो गया है।
मेयर बोलीं- विकास में किसी के साथ भेदभाव नहीं
मेयर सुधा गुप्ता का कहना है कि निगम क्षेत्र के समग्र विकास और जनसमस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी पार्षद के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। बोर्ड बैठकों के माध्यम से जरूरी योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया जारी है। कुछ लोग अनावश्यक राजनीति कर विकास कार्यों में अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।
डिप्टी मेयर ने पारदर्शी व्यवस्था पर दिया जोर
डिप्टी मेयर राहुल कश्यप का कहना है कि मानगो की जनता की समस्याओं का समाधान और क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी को विश्वास में लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाना जरूरी है। योजनाओं का टेंडर रद्द होना और बैठकों में देरी होना चिंता का विषय है। हर वार्ड में सफाई, पानी, कचरा संग्रहण, जलजमाव और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाना चाहिए।
एकता मंच ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
वार्ड पार्षद एकता मंच के अध्यक्ष राजेश सिंह का आरोप है कि निगम में पार्षदों की लगातार अनदेखी हो रही है। आठ-नौ महीनों में केवल दो अधूरी बोर्ड बैठकें हुई हैं। जब पार्षद जनता की समस्याएं लेकर जाते हैं, तो अधिकारी और मेयर उनकी बातों को तवज्जो नहीं देते। मानगो की जनता पानी, अंधेरी सड़कों और कचरे जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान है। इन्हीं उपेक्षाओं के खिलाफ पार्षदों ने एकजुट होकर मंच बनाया है। व्यवस्था में सुधार होने तक संघर्ष जारी रहेगा।












