
बेगूसराय : आमतौर पर नेताओं के नाम पर सड़कें और चौक मिलते हैं, लेकिन वीरपुर प्रखंड की पर्रा पंचायत में ग्रामीणों ने इस परंपरा को नया मोड़ दे दिया। पर्रा–सरौंजा सड़क की बदहाली से परेशान लोगों ने पानी भरे गड्ढों का नाम ही जनप्रतिनिधियों के नाम पर रख दिया। सड़क की सूरत कब बदलेगी, यह तो पता नहीं, लेकिन उसके गड्ढों को पहचान जरूर मिल गई है। शनिवार को ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर यह अनोखा प्रदर्शन किया। गड्ढों के पास तस्वीरों वाली तख्तियां लगाकर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। विरोध का तरीका व्यंग्य से भरा था, मगर इसके पीछे की परेशानी बिल्कुल वास्तविक है।
मरम्मत की जगह मिला नाम का बोर्ड
प्रदर्शनकारियों ने किसी गड्ढे को ‘गिरिराज सिंह कुंड’, किसी को ‘कुंदन कुमार कुंड’ और किसी को ‘शैलेंद्र कुमार कुंड’ का नाम दिया। सांसद, विधायक और मंत्री के नाम वाली तख्तियां लगाकर ग्रामीणों ने जिम्मेदारों का ध्यान सड़क की हालत की ओर खींचने की कोशिश की। यह नामकरण किसी पर्यटन योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि नाराजगी जताने का तरीका था। संदेश साफ था—जिनसे सड़क सुधारने की उम्मीद है, उनके नाम अब उन्हीं गड्ढों के पास नजर आएंगे, जिन्हें भरवाने की मांग की जा रही है।
‘मॉडल पंचायत’ में रास्ता तलाशते लोग
ग्रामीणों के अनुसार, पर्रा पंचायत को मॉडल पंचायत कहा जाता है, लेकिन मुख्य सड़क की हालत इस पहचान से मेल नहीं खाती। जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और हल्की बारिश में भी पानी जमा हो जाता है। राहगीरों को परेशानी होती है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। हालत ऐसी है कि सफर करते समय मंजिल के साथ सुरक्षित रास्ता भी तलाशना पड़ता है। यहां विकास की चर्चा के बीच ग्रामीणों का सवाल सीधा है—रोज गुजरने वाली सड़क आखिर कब ठीक होगी?
छह वर्षों से ठोस पहल नहीं होने का आरोप
स्थानीय ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ता ऋषभ कुमार के अनुसार, पूर्व विधायक अमिता भूषण के प्रयास से इस सड़क का निर्माण कराया गया था। उनका आरोप है कि वर्ष 2020 में कुंदन कुमार के विधायक बनने के बाद पिछले छह वर्षों में मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीण पप्पू सहनी ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने आते हैं, लेकिन बाद में जनता की समस्याओं की सुध नहीं लेते।
नामकरण पूरा, अब निर्माण की बारी
प्रदर्शन में अरविंद यादव, रंजीत सहनी, मोगल सहनी, संजीत सहनी और संजय कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने विधायक, सांसद और संबंधित विभाग के मंत्री से सड़क का अविलंब निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों के इस विरोध ने शिकायत को एक रोचक रूप जरूर दिया है। अब देखना यह है कि तख्तियों पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों के नाम सड़क की मरम्मत तक भी पहुंच बनवा पाते हैं या नहीं। फिलहाल गड्ढों का नामकरण हो चुका है; जनता को उनके भरने का इंतजार है।












