
- 66 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर बैंकों से लिया गया था कर्ज
- 100 से अधिक शेल कंपनियों में रकम डायवर्ट करने का आरोप, झारखंड और बंगाल में एक साथ छापेमारी
सरायकेला : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित खुचीडीह में 66 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने का सपना वर्षों बाद भी अधूरा है। जिस परियोजना के नाम पर बैंकों से करीब 290 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, वह आज बंद पड़ी है। अब इसी कथित बैंक ऋण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार सुबह ईडी की टीम ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की।
चांडिल के खुचीडीह स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट परिसर में जमशेदपुर और रांची से पहुंची ईडी की संयुक्त टीम ने दस्तावेजों और कंपनी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। वहीं, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, हुगली, लेक टाउन और आसनसोल में भी तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान कंपनी से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य सहयोगियों के ठिकानों को खंगाला गया।
प्लांट लगाने के नाम पर लिया था कर्ज
कोहिनूर ग्रुप ने वर्ष 2005 में झारखंड सरकार के साथ एमओयू किया था। इसके तहत स्पंज आयरन, टीएमटी बार और पावर प्लांट स्थापित करने की योजना थी। चांडिल के खुचीडीह में 66 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट प्रस्तावित था। आरोप है कि कंपनी ने परियोजना के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम से वर्ष 2008 से 2013 के बीच करीब 290 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा हासिल की। हालांकि, समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद वर्ष 2016 तक परियोजना पूरी नहीं हो सकी।
100 से अधिक शेल कंपनियों में रकम भेजने का आरोप
जांच में आरोप सामने आया है कि बैंक से प्राप्त ऋण की राशि का इस्तेमाल प्रस्तावित बिजली परियोजना में करने के बजाय 100 से अधिक शेल कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर प्रमोटरों और उनके परिजनों के नाम पर निजी संपत्तियां खरीदने तथा व्यक्तिगत खर्चों में किया गया। ईडी अब इसी मनी ट्रेल को खंगाल रही है।
बैंकों को हुआ भारी नुकसान
वर्ष 2015 में कंपनी का बैंक खाता एनपीए घोषित कर दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2018 में एनसीएलटी में दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 2019 में लिक्विडेशन के दौरान बैंकों को महज सात करोड़ रुपये मिले। इस तरह करीब 290 करोड़ रुपये के कर्ज के मुकाबले बैंकों को 97.5 प्रतिशत से अधिक नुकसान उठाना पड़ा। जांच में कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में प्रमोटरों तथा उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों का भी जिक्र सामने आया है। इन संपत्तियों से करीब 26 लाख रुपये मासिक किराये की आय होने का दावा किया गया है।
अब कंपनी के पूरे नेटवर्क की पड़ताल
ईडी की जांच केवल प्लांट और बैंक ऋण तक सीमित नहीं है। कंपनी के निदेशकों, प्रमोटरों, लेखा परीक्षकों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और समाधान पेशेवरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। साथ ही, एनसीएलटी की दिवाला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल खुचीडीह स्थित पावर प्लांट वर्षों से बंद है और आदित्यपुर के आशियाना ट्रेड सेंटर स्थित कंपनी कार्यालय की मौजूदा गतिविधियां भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ईडी ने छापेमारी में मिले साक्ष्यों को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।












