
- 70 साल की उम्र में सबाई घास की रस्सी बेचकर खरीदती हैं चावल-दाल, जर्जर झोपड़ी में गुजर रही जिंदगी; बारिश में ढह गया आशियाना
पुरुलिया : सरकारी योजनाओं के जरिए गरीबों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बंदवान प्रखंड की राजग्राम पंचायत अंतर्गत चिटलपाड़ा की करीब 70 वर्षीय कलावती सिंह की जिंदगी इन दावों से अलग तस्वीर पेश करती है। उनके पास न आधार कार्ड है, न राशन कार्ड और न ही मतदाता पहचान पत्र। सरकारी दस्तावेजों में पहचान नहीं होने के कारण वह बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। सवाल यह है कि आखिर सरकारी व्यवस्था तक उनकी पहुंच क्यों नहीं बन पाई?
सबाई घास की रस्सी बेचकर खरीदती हैं चावल-दाल
कलावती की जिंदगी आज भी एक जर्जर झोपड़ी में गुजर रही है। सिर पर तालपत्ते और खपरैल की छत, चारों तरफ बांस और लकड़ियों की घेराबंदी। पेट पालने के लिए वह सबाई घास से रस्सी बनाती हैं। उसे बेचकर मिलने वाले पैसों से चावल-दाल खरीदती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है।
पति की मौत के बाद अकेली रह गईं
जानकारी के अनुसार, कई वर्ष पहले पति की मृत्यु के बाद वह कुछ समय तक अपनी बेटी के साथ रहीं। पिछले चार-पांच वर्षों से वह अकेले जीवन गुजार रही हैं। जिस जगह उनकी झोपड़ी बनी है, वह जमीन भी उनकी अपनी नहीं है। ऐसे में उनके सामने आवास और आजीविका दोनों का संकट है।
बारिश में ढह गई झोपड़ी
लगातार बारिश के कारण उनकी जर्जर झोपड़ी का एक हिस्सा ढह गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से उन्हें तिरपाल, हांडी-कड़ाही समेत कुछ जरूरी घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया। हालांकि, यह मदद अस्थायी है। कलावती को अब भी सुरक्षित आवास और नियमित राशन की जरूरत है।
नाती ने प्रशासन से लगाई गुहार
कलावती के रिश्ते के नाती सुकांत सिंह ने प्रशासन से बुजुर्ग महिला के लिए जल्द आवास और राशन की व्यवस्था करने की मांग की है। बंदवान प्रखंड प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, महिला को तिरपाल और जरूरी घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया है। जल्द ही राशन की व्यवस्था करने की बात कही गई है।
सरकारी योजनाओं तक पहुंच पर सवाल
कलावती की कहानी पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं की पहुंच और जरूरतमंदों की पहचान से जुड़े सवाल खड़े करती है। आखिर एक बुजुर्ग महिला वर्षों तक बिना पहचान पत्र, राशन कार्ड और आवासीय सुरक्षा के कैसे जीवन गुजारती रही? क्या प्रशासन ने पहले कभी उनकी स्थिति का सर्वे किया? अब जरूरत है कि उनके दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर पात्रता के अनुसार उन्हें राशन, पेंशन और आवास योजना से जोड़ा जाए।












