
सरायकेला : चांडिल डैम विस्थापितों के पुनर्वास और अनुदान भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ी है। करीब 13 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े मामले की पड़ताल कर रही पांच सदस्यीय समिति संबंधित फाइलें रांची ले गई है। अब इन दस्तावेजों के आधार पर लाभुकों की पात्रता, भुगतान की स्वीकृति और सत्यापन प्रक्रिया की जांच होने की उम्मीद है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग की ओर से गठित समिति ने पूछताछ के बाद संबंधित कार्यालय में भुगतान अभिलेखों का अवलोकन किया। सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना, आदित्यपुर-जमशेदपुर के अंतर्गत 180 से 183 आरएल तक प्रभावित गांवों की फाइलें बारी-बारी से देखी गईं। इसके बाद टीम दस्तावेज अपने साथ ले गई।
वास्तविक विस्थापितों की जगह अपात्रों को भुगतान का आरोप
मामले में लगभग दस गांवों के विस्थापित परिवारों के लिए करीब 13 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ वास्तविक हकदारों को लाभ नहीं मिला, जबकि दूसरे गांवों के कथित अपात्र लोगों को भुगतान कर दिया गया। इन शिकायतों के बीच पुनर्वास कार्यालय संख्या-दो, चांडिल और अपर निदेशक कार्यालय, आदित्यपुर की भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है।
हेवन गांव में बैंक भुगतान और सत्यापन पर सवाल
नीमडीह प्रखंड का हेवन गांव जांच के दौरान विशेष चर्चा में है। यहां कई लाभुकों को एक ही बैंक के माध्यम से राशि दिए जाने के आधार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग है कि भुगतान से पहले लाभुकों की पात्रता और उनके दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था। शिकायतों के निपटारे के लिए लाभुक सूची, बैंक विवरण, स्वीकृति आदेश और सत्यापन अभिलेखों का मिलान करने की मांग की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया और पात्र परिवारों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की मांग
चांडिल डैम कार्यालय परिसर के आसपास सक्रिय कथित बिचौलियों के हस्तक्षेप के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतों में आम के पेड़ के नीचे बैठकर विस्थापितों के मामलों में लेनदेन कराने का उल्लेख है। ऐसे लोगों की भूमिका और संपत्ति की जांच की मांग उठी है। ये आरोप भी अभी जांच के अधीन हैं।
पारदर्शी रिपोर्ट और बकाया अनुदान की उम्मीद
विस्थापित संगठनों ने सभी प्रभावित गांवों की भुगतान फाइलों की निष्पक्ष जांच और निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि संलिप्तता प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी या बिचौलिए के विरुद्ध कार्रवाई हो। साथ ही वंचित पात्र परिवारों को बकाया पुनर्वास अनुदान शीघ्र मिले। अब प्रभावित परिवारों की निगाहें समिति की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर हैं।












