
- जुगसलाई नगर परिषद में एक साल बाद भी नहीं मिलीं बुनियादी सुविधाएं, निजी पैसे से खरीदा कूलर और बैठने का सामान; 20 से 30 लाख रुपये के बिलों की जांच को लेकर भी महकमे में हलचल।
जमशेदपुर : सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों के लिए कुर्सी-टेबल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं होना सामान्य बात है, लेकिन जुगसलाई नगर परिषद में तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है। यहां तैनात लेखा पदाधिकारी कुमारी शुभ्रा जायसवाल कुर्सी और टेबल पर बैठकर नहीं, बल्कि जमीन पर दरी और चादर बिछाकर सरकारी फाइलों का निपटारा कर रही हैं। उनके बैठने का यह अनोखा तरीका इन दिनों नगर परिषद कार्यालय से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्यालय में फर्श पर लाल दरी बिछाई गई है। उसके ऊपर सफेद चादर डाली गई है। पीठ को सहारा देने के लिए एक तकिया रखा गया है, जबकि फाइलों को देखने और लिखने के लिए सामने लकड़ी की छोटी-सी चौकी है। इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे लेखा पदाधिकारी प्रतिदिन सरकारी कामकाज निपटा रही हैं। उनके इस तरीके को कार्यालय की बुनियादी सुविधाओं के अभाव के खिलाफ एक तरह के मौन विरोध के रूप में भी देखा जा रहा है।
एक साल बाद भी नहीं मिलीं बुनियादी सुविधाएं
जानकारी के अनुसार, पिछले साल जुगसलाई नगर परिषद में पदस्थापन के बाद लेखा पदाधिकारी को बैठने के लिए एक कक्ष आवंटित किया गया था। हालांकि, उस कमरे में जरूरी सुविधाओं और उपयुक्त फर्नीचर का अभाव था। यहां तक कि पंखे की भी व्यवस्था नहीं थी। बार-बार आग्रह के बावजूद जब अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो उन्होंने अपने निजी पैसों से कूलर और बैठने का सामान जुटाया।
इसके बावजूद कार्यालय में उनके काम करने की व्यवस्था सामान्य अधिकारियों जैसी नहीं हो सकी। अब वह जमीन पर बैठकर ही सरकारी फाइलों का निपटारा कर रही हैं। एक जिम्मेदार पदाधिकारी के लिए कार्यस्थल पर न्यूनतम सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर यह मामला नगर परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
20 से 30 लाख रुपये के बिलों की जांच से बढ़ी हलचल
लेखा पदाधिकारी की चर्चा केवल उनके जमीन पर बैठकर काम करने को लेकर ही नहीं है। पदभार संभालने के बाद से वह भुगतान से संबंधित फाइलों और बिलों की बारीकी से जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि बिना जरूरी दस्तावेज और वित्तीय नियमों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी हुए वह किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने में सावधानी बरत रही हैं।
इस सख्ती के कारण ठेकेदारों के करीब 20 से 30 लाख रुपये के बिल लंबित बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कार्यालय के प्रशासनिक खर्चों और वाहनों से संबंधित बिलों की भी जांच किए जाने की चर्चा है। हालांकि, लंबित भुगतान को किसी वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित बिलों और आपत्तियों की आधिकारिक जानकारी जरूरी है।
वरीय अधिकारियों को लिखित में दे चुकी हैं जानकारी
अपनी कार्यशैली और कार्यालय में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर लेखा पदाधिकारी कुमारी शुभ्रा जायसवाल का कहना है कि उन्होंने संबंधित सभी बातें वरीय अधिकारियों और विभाग को लिखित रूप में दे दी हैं। वह अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रही हैं और इस मामले में उन्हें कुछ नहीं कहना है।
वहीं, जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी संदीप पासवान ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद लेखा पदाधिकारी से बातचीत की गई थी। उन्हें अन्य अधिकारियों की तरह बैठकर काम करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इस बात को अनसुना कर दिया।
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
जुगसलाई नगर परिषद की यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर एक साल से अधिक समय तक पदस्थापित रहने के बावजूद एक लेखा पदाधिकारी को बैठने के लिए उचित कुर्सी और टेबल क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई? क्या नगर परिषद में अधिकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई जवाबदेही तय है? वहीं, लंबित बिलों की जांच और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
फिलहाल, जमीन पर बैठकर सरकारी फाइलों का निपटारा करती लेखा पदाधिकारी की तस्वीर ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।












