
- ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ेगा विद्यार्थियों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड, सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में स्वास्थ्य केंद्र व काउंसलर होंगे अनिवार्य
रांची : झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ी पहल की गई है। अब प्रत्येक विद्यार्थी की डिजिटल हेल्थ आईडी बनाई जाएगी। इसके माध्यम से छात्र के स्वास्थ्य से जुड़ी पूरी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर एक क्लिक में विद्यार्थी का हेल्थ रिकॉर्ड देखा जा सकेगा। इसके लिए विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर कराया जाएगा।
राज्य सरकार ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के हेल्थ केयर मैनेजमेंट एंड मेंटल वेलबीइंग परिनियम को स्वीकृति दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के साथ संस्थानों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
एक क्लिक पर उपलब्ध होगा पूरा हेल्थ रिकॉर्ड
डिजिटल हेल्थ आईडी बनने के बाद विद्यार्थियों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा। विद्यार्थियों को जरूरत के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग, वीडियो और ऑडियो के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा भी मिलेगी। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर भी डिजिटल माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
हालांकि, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और काउंसलिंग से जुड़ी जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करना संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।
सभी सरकारी विवि और कॉलेजों में होंगे स्वास्थ्य केंद्र
नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करना अनिवार्य होगा। इन स्वास्थ्य केंद्रों में फुल टाइम डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और काउंसलर उपलब्ध रहेंगे। इससे विद्यार्थियों को सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए कॉलेज परिसर में ही प्राथमिक चिकित्सा और परामर्श मिल सकेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान चिकित्सा सहायता के लिए परिसर से बाहर जाने की परेशानी कम करना है।
हॉस्टलों में 24 घंटे नर्स और एंबुलेंस की सुविधा
जिन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हॉस्टल संचालित हैं, वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। ऐसे संस्थानों में सिक रूम की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसके अलावा 24 घंटे स्टाफ नर्स और एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रखनी होगी। इससे हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को रात के समय अचानक तबीयत बिगड़ने या किसी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी रहेगा विशेष जोर
नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति की अध्यक्षता में यूनिवर्सिटी हेल्थ एंड वेलनेस काउंसिल गठित होगी। वहीं, कॉलेज स्तर पर प्राचार्य की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी।
ये समितियां स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सेवाओं की निगरानी करेंगी। विद्यार्थियों को मानसिक तनाव और दूसरी मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने के लिए आवश्यक परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हर सेमेस्टर योग और ध्यान की दो कार्यशालाएं
विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए नियमित गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक सेमेस्टर में योग, ध्यान, कला, संगीत और नृत्य से संबंधित दो कार्यशालाएं आयोजित करना अनिवार्य होगा। वहीं, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सालाना तीन कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर 51.29 करोड़ रुपये
राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़ी सुविधाओं के लिए कुल 51.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान खबर में बताया गया है। इस राशि के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा सुविधाओं, स्वास्थ्य केंद्रों, काउंसलिंग और मानसिक कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की पहल की जाएगी।
खबर के प्रमुख तथ्य
- हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल हेल्थ आईडी।
- ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर होगा रजिस्ट्रेशन।
- एक क्लिक पर उपलब्ध होगा इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड।
- सभी सरकारी विवि और अंगीभूत कॉलेजों में स्वास्थ्य केंद्र अनिवार्य।
- स्वास्थ्य केंद्रों में फुल टाइम डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और काउंसलर रहेंगे।
- हॉस्टल वाले संस्थानों में सिक रूम, 24 घंटे नर्स और एंबुलेंस की व्यवस्था।
- ऑनलाइन काउंसलिंग और वीडियो-ऑडियो परामर्श की सुविधा।
- हर सेमेस्टर दो कार्यशालाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर सालाना तीन कार्यशालाएं।












