
- मानगो से कपाली तक नदी के बहाव क्षेत्र में धड़ल्ले से डाली जा रही मिट्टी, फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट लाने की तैयारी के बीच प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल; एनजीटी के आदेश भी बेअसर
जमशेदपुर : झारखंड सरकार नदियों को अतिक्रमण और कटाव से बचाने के लिए फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट 2026 लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन दूसरी ओर सुवर्णरेखा नदी के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है। जमशेदपुर के मानगो से लेकर सरायकेला-खरसावां जिले के डोबो और कपाली तक नदी के किनारों पर धड़ल्ले से मिट्टी की डंपिंग की जा रही है। आरोप है कि रात के अंधेरे में मिट्टी डालकर नदी के बहाव क्षेत्र को पाटने और उसकी प्राकृतिक सीमा बदलने की कोशिश हो रही है।
हैरानी की बात यह है कि नदी के किनारे हो रही इस गतिविधि पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। कई स्थानों पर मिट्टी डालकर नदी के किनारे को ऊंचा किया जा रहा है। इससे नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र के सिकुड़ने और भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है।
रात के अंधेरे में चल रहा मिट्टी डंपिंग का खेल
सुवर्णरेखा नदी के मानगो क्षेत्र में कई स्थानों पर नदी किनारे मिट्टी डालकर जमीन को भरने का काम किया जा रहा है। इसी तरह डोबो और कपाली इलाके में भी नदी के किनारे मिट्टी की डंपिंग की जा रही है। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसकी अनुमति से नदी के इतने करीब मिट्टी डाली जा रही है?
पिछली बाढ़ के दौरान नदी किनारे बने कई बड़े अपार्टमेंट के आसपास की जमीन का कटाव हुआ था। इसके बाद अब दोबारा मिट्टी डालकर किनारों को भरने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, नदी के बहाव क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों की वैधता और इसके पर्यावरणीय प्रभाव की जांच जरूरी है।
चार महीने पहले भी डाली गई थी मिट्टी
कपाली इलाके में नदी किनारे मिट्टी डंपिंग का मामला नया नहीं है। करीब चार महीने पहले भी यहां बड़े पैमाने पर मिट्टी डाली गई थी। अब दोबारा इसी तरह की गतिविधियां सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि जमीन की कीमत बढ़ाने और भविष्य में निर्माण की संभावनाओं के मद्देनजर नदी के किनारे को भरा जा रहा है।
मानगो क्षेत्र में भी बड़े बिल्डरों की ओर से नदी किनारे मिट्टी भरने की गतिविधियां सामने आई हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि क्या नदी की प्राकृतिक सीमा को धीरे-धीरे खत्म कर वहां जमीन तैयार करने की कोशिश हो रही है?
एनजीटी के आदेश के बावजूद नहीं रुक रहा अतिक्रमण
नदियों के किनारे अतिक्रमण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। नदी के किनारों से अतिक्रमण हटाने और प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद सुवर्णरेखा के किनारे मिट्टी डंपिंग की गतिविधियां जारी रहने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी भरने से सिर्फ नदी का प्राकृतिक स्वरूप ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि आसपास के इलाकों में जलजमाव और बाढ़ की स्थिति भी गंभीर हो सकती है।
नदी का बहाव क्षेत्र बचाना जरूरी : विशेषज्ञ
कोसी नदी पर लंबे समय तक काम कर चुके नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र ने कहा कि नदी के रिवर बेड (बहाव क्षेत्र) को साफ और अतिक्रमण मुक्त रखना बेहद जरूरी है। नदी के प्राकृतिक बहाव में किसी तरह की बाधा आने से बाढ़ और दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नदी को सुरक्षित रखने के लिए सरकारी मशीनरी को सक्रिय होना होगा। अगर समय रहते अतिक्रमण और मिट्टी डंपिंग पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। नदी के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखना ही बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने का महत्वपूर्ण उपाय है।
कानून बनाने की तैयारी, लेकिन नदी को बचाने की चुनौती
झारखंड सरकार फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट 2026 के माध्यम से नदियों के बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण और अतिक्रमण पर नियंत्रण की तैयारी कर रही है। लेकिन सुवर्णरेखा के किनारे सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि कानून बनने का इंतजार किए बिना भी मौजूदा पर्यावरणीय और राजस्व नियमों के तहत कार्रवाई की जरूरत है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी डाली जा रही है तो संबंधित विभाग इसकी निगरानी क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या प्रशासन नदी की जमीन का सीमांकन कराएगा? क्या अवैध रूप से मिट्टी डालने वालों की पहचान होगी? और क्या नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित करने वाली मिट्टी हटाई जाएगी?
सुवर्णरेखा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जमशेदपुर और आसपास के हजारों परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ी है। ऐसे में सवाल यही है कि जब नदी का रास्ता ही पाट दिया जाएगा तो बाढ़ के पानी को रास्ता कहां मिलेगा?












