
बंदवान : उम्र के जिस पड़ाव पर आराम और अपनों के सहारे की जरूरत होती है, उस समय करीब 70 वर्षीय कलावती सिंह रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। कुचिया पंचायत के राजग्राम स्थित चिटलापाड़ा में रहने वाली इस बुजुर्ग के पास न राशन कार्ड है, न आधार कार्ड और न ही मतदाता पहचान पत्र। सबाई घास की रस्सियां बनाकर और उन्हें बेचकर वह खाने का इंतजाम करती हैं। लगातार बारिश में झोपड़ी का एक हिस्सा गिरने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
पहचान के दस्तावेज नहीं, सुविधाओं से दूरी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कलावती वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजार रही हैं। जरूरी सरकारी कागजात नहीं होने के कारण वह कई कल्याणकारी सुविधाओं से वंचित हैं। उनका कहना है कि अब तक उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। उनकी स्थिति ने स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था की नजर उन पर पहले क्यों नहीं पड़ी। ग्रामीण अब उन्हें पात्रता के अनुसार सरकारी सुविधाओं से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
पति की मौत के बाद बढ़ता गया अकेलापन
कई वर्ष पहले पति के निधन के बाद कलावती कुछ समय तक अपनी बेटी के साथ रहीं। हालांकि, पिछले चार-पांच वर्षों से वह अकेले रह रही हैं। जिस जमीन पर उनकी झोपड़ी बनी है, वह भी उनकी अपनी नहीं है।बांस और लकड़ी की घेराबंदी तथा ताड़ के पत्तों और खपरैल की छत के नीचे उनका गुजर-बसर होता है। रहने का स्थायी ठिकाना नहीं होने से मौसम की मार उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। हाल की बारिश ने इसी कमजोर आश्रय को भी नुकसान पहुंचाया है।
सबाई की रस्सी से चलता है चूल्हा
कलावती अपनी आजीविका के लिए सबाई घास से रस्सी तैयार करती हैं। उसे बेचकर मिलने वाली रकम से चावल-दाल खरीदती हैं। उनके अनुसार, देखभाल करने वाला कोई नहीं है और इसी काम के सहारे किसी तरह जीवन चल रहा है। झोपड़ी का हिस्सा ढहने के बाद सुरक्षित रहने की चिंता भी उनकी रोज की जरूरतों में जुड़ गई है। भोजन और सिर ढकने की जगह, दोनों का इंतजाम उनके लिए मुश्किल बना हुआ है।
अस्थायी मदद मिली, स्थायी राहत की मांग
बारिश से नुकसान के बाद प्रशासन की ओर से कलावती को तिरपाल, हांडी-कड़ाही और अन्य जरूरी सामान दिया गया है। बंदवान प्रखंड प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, उनके लिए जल्द राशन की व्यवस्था भी की जाएगी। कलावती के रिश्ते के नाती सुकांत सिंह ने प्रशासन से आवास और भोजन की व्यवस्था करने की अपील की है। ग्रामीणों की मांग है कि अस्थायी सहायता के साथ उनके दस्तावेज बनवाने और पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाए, ताकि बुजुर्ग को स्थायी राहत मिल सके।












