
- शरीर में पानी और पोटैशियम का संतुलन बिगड़ने से बढ़ सकती हैं गंभीर जटिलताएं, बिना डॉक्टर की सलाह न करें सेवन
जमशेदपुर : नारियल पानी को सेहत के लिए फायदेमंद प्राकृतिक पेय माना जाता है। शरीर को हाइड्रेट रखने और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति में इसकी अहम भूमिका होती है। लेकिन किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे और नियमित डायलिसिस करा रहे मरीजों के लिए इसका सेवन परेशानी का कारण बन सकता है। नारियल पानी में मौजूद पोटैशियम की अधिक मात्रा शरीर में जमा हो सकती है। इससे खून में पोटैशियम का स्तर बढ़ने और गंभीर स्थिति में दिल की धड़कन प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे मरीजों के लिए नारियल पानी पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
जमशेदपुर के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार के अनुसार, डायलिसिस मरीजों के खानपान से जुड़ी सावधानियों को समझना महत्वपूर्ण है। किडनी जब सामान्य रूप से काम नहीं करती तो शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम और पानी बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। डायलिसिस के बावजूद मरीजों को अपने खानपान और तरल पदार्थों की मात्रा पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
डायलिसिस मरीजों के लिए क्यों बढ़ सकता है खतरा?
नारियल पानी में प्राकृतिक रूप से पोटैशियम पाया जाता है। सामान्य किडनी अतिरिक्त पोटैशियम को पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। लेकिन किडनी फेल होने की स्थिति में यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
ऐसे में शरीर में पोटैशियम जमा होने लगता है। खून में पोटैशियम का स्तर सामान्य से अधिक होने की स्थिति को हाइपरकलेमिया कहते हैं। यह समस्या कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में इससे दिल की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। हृदय की धड़कन अनियमित होने के साथ जानलेवा जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।
डायलिसिस के बाद भी खानपान में जरूरी है सावधानी
कई मरीजों को लगता है कि डायलिसिस कराने से शरीर में जमा सभी अतिरिक्त तत्व पूरी तरह निकल जाते हैं और वे सामान्य खानपान कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। डायलिसिस के बीच भी शरीर में पोटैशियम और तरल पदार्थ जमा हो सकते हैं।
विशेषकर जिन मरीजों के शरीर में पेशाब बहुत कम बनता है या बिल्कुल नहीं बनता, उन्हें पानी और अन्य पेय पदार्थों की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नारियल पानी भी इसी तरल सेवन का हिस्सा है। इसका अधिक सेवन शरीर में पानी जमा होने, सूजन और सांस लेने में परेशानी का कारण बन सकता है।
पोटैशियम बढ़ने के ये संकेत न करें नजरअंदाज
खून में पोटैशियम बढ़ने पर कुछ मरीजों को मांसपेशियों में कमजोरी, थकान, झनझनाहट या धड़कन असामान्य महसूस हो सकती है। हालांकि, कई बार कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। गंभीर स्थिति में हृदय की धड़कन खतरनाक रूप से प्रभावित हो सकती है।औ
इसलिए डायलिसिस कराने वाले मरीजों को नियमित रूप से ब्लड पोटैशियम की जांच करानी चाहिए। धड़कन में गड़बड़ी, बेहोशी या सीने में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
केला, संतरा और सूखे मेवों पर भी रखें ध्यान
किडनी के मरीजों को केवल नारियल पानी ही नहीं, बल्कि अन्य पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन पर भी ध्यान देना चाहिए। केला, संतरा, सूखे मेवे और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में पोटैशियम की मात्रा अधिक हो सकती है।
हालांकि, सभी खाद्य पदार्थों पर हर मरीज के लिए एक जैसी पाबंदी जरूरी नहीं है। मरीज की ब्लड रिपोर्ट, डायलिसिस की स्थिति और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार डाइट चार्ट तैयार किया जाना चाहिए।
हर मरीज के लिए अलग हो सकती है नारियल पानी की मात्रा
डायलिसिस कराने वाले सभी मरीजों को नारियल पानी पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, यह जरूरी नहीं है। इसका निर्णय मरीज के ब्लड पोटैशियम स्तर, पेशाब की मात्रा, डायलिसिस शेड्यूल और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को देखकर किया जाता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना नारियल पानी को रोजाना की डाइट में शामिल करना उचित नहीं है। मरीजों को अपनी मर्जी से तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाने या घटाने के बजाय विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित आहार का पालन करना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह : डायलिसिस मरीजों के लिए पानी की मात्रा भी महत्वपूर्ण
किडनी की गंभीर बीमारी में खानपान का सीधा संबंध मरीज की स्वास्थ्य स्थिति से होता है। ऐसे मरीजों के लिए पोटैशियम के साथ शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। इसलिए नारियल पानी जैसे प्राकृतिक पेय का सेवन भी डॉक्टर और किडनी डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। नियमित जांच, निर्धारित डायलिसिस और संतुलित खानपान से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।












