
रनिया : सोशल मीडिया पर गांव की पानी की समस्या दिखाने वाला एक वीडियो किसी के लिए अपनों तक पहुंचने का रास्ता बन जाएगा, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा। करीब तीन दशक पहले परिवार से संपर्क खो चुके सुरेंद्र सिंह के साथ ऐसा ही हुआ। लद्दाख में रह रहे सुरेंद्र की नजर अपने गांव से जुड़े वीडियो पर पड़ी और वर्षों से टूटी संपर्क की कड़ी फिर जुड़ने लगी। हालांकि, परिवार का पता मिलने की खुशी के बीच पिता के निधन की जानकारी ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया।
काम की तलाश में निकले, छूटता गया घर का साथ
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र जयपुर पंचायत के किशुनपुर गांव के खुदबीर के रहने वाले हैं। उनकी मां का नाम कलावती देवी है। वर्ष 1995 में वह काम करने के लिए हिमाचल प्रदेश गए थे। उस समय उनकी उम्र लगभग 15 वर्ष बताई गई है। घर से निकलने के बाद धीरे-धीरे परिवार से उनका संपर्क टूट गया। उन्होंने कई बार वापस लौटने की कोशिश की, लेकिन परिजनों तक नहीं पहुंच सके। समय बीतता गया और अपनों से दूरी करीब 30 वर्षों की हो गई। वर्तमान में वह लद्दाख में चीन की सीमा के पास रह रहे हैं।
गांव की परेशानी बनी घर तक पहुंचने का जरिया
इस लंबे इंतजार में अचानक एक सोशल मीडिया वीडियो ने नई उम्मीद जगाई। खबर के मुताबिक, दो दिन पहले सुरेंद्र ने किशुनपुर गांव के खुदबीर में पानी की समस्या से संबंधित एक वीडियो देखा। अपने गांव से जुड़ी जानकारी सामने आने पर उन्होंने उस सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो किया। इसके बाद उन्होंने रविंद्र बड़ाइक का मोबाइल नंबर तलाशा और उनसे संपर्क किया। बातचीत के दौरान सुरेंद्र ने अपना परिचय दिया। उन्होंने गांव का नाम और पता बताते हुए अपने माता-पिता से बात करने की इच्छा जताई। जिस वीडियो में ग्रामीणों की परेशानी उठाई गई थी, वही उनके लिए परिवार की जानकारी हासिल करने का माध्यम बन गया।
पिता के निधन की सूचना से लगा गहरा आघात
वर्षों बाद अपनों का पता मिलने से सुरेंद्र के मन में परिवार से जुड़ने की उम्मीद जगी थी। लेकिन इसी दौरान उन्हें मालूम हुआ कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह जानकारी उनके लिए बेहद दुखद रही।करीब तीन दशक की दूरी के बाद घर से संपर्क का रास्ता खुलना उनके जीवन का भावुक मोड़ है। एक ओर परिवार तक पहुंचने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर पिता से दोबारा नहीं मिल पाने का दुख भी जुड़ गया है।
अब गांव लौटने की उम्मीद
सुरेंद्र की कहानी में सोशल मीडिया संपर्क का अहम माध्यम बनकर सामने आया है। गांव की एक बुनियादी समस्या पर बने वीडियो ने वर्षों से बिछड़े व्यक्ति को अपने लोगों तक पहुंचने का रास्ता दिखाया। अब उनके झारखंड लौटने की उम्मीद बनी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में वापसी की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। फिलहाल, लंबे अंतराल के बाद परिवार की जानकारी मिलना और संपर्क की कड़ी जुड़ना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।












