
दुमका : सुबह काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर दरवाजा तोड़ा गया। कमरे में मां और उसकी तीन बेटियां बेहोश पड़ी थीं। सभी को तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने निक्की कुमारी को मृत घोषित कर दिया। मां और दो अन्य बेटियों का उपचार जारी है। इनमें 11 दिन की नवजात भी शामिल है। घटना मंगलवार को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बेहराबांक गांव में हुई। शुरुआती जानकारी में बंद कमरे में जलाई गई अंगीठी के धुएं से दम घुटने की आशंका जताई गई है। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
नवजात की देखभाल के लिए साथ सोई थीं बेटियां
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गांव निवासी दिलीप सिंह रात में रिंग रोड स्थित अपने लाइन होटल में ही रुक गए थे। घर पर उनकी पत्नी रीना देवी और पांच बेटियां मौजूद थीं। रीना देवी अपनी 11 दिन की नवजात और दो अन्य बेटियों के साथ एक कमरे में सोई थीं। बाकी दो बेटियां दूसरे कमरे में थीं। परिजनों के मुताबिक, नवजात को ठंड से बचाने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर रखी गई थी। रात में दरवाजे और खिड़कियां भी बंद थीं। सुबह देर तक कमरा नहीं खुलने पर स्वजनों को अनहोनी की चिंता हुई।
दरवाजा तोड़कर निकाला, अस्पताल ले गए परिजन
काफी देर तक दरवाजा बंद रहने के बाद परिजन उसे तोड़कर अंदर पहुंचे। वहां रीना देवी और तीनों बच्चियां अचेत अवस्था में मिलीं। उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में निक्की कुमारी की मौत की पुष्टि हुई। रीना देवी और एक अन्य बेटी की हालत चिंताजनक बताई गई है। उपलब्ध खबर के अनुसार, उपचाराधीन नवजात की स्थिति खतरे से बाहर है। एक बच्ची की मौत और परिवार के तीन सदस्यों के अस्पताल में भर्ती होने से स्वजन गहरे सदमे में हैं।
धुएं से दम घुटने की आशंका, जांच बाकी
गृहस्वामी प्रकाश सिंह ने आशंका जताई कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से यह घटना हुई होगी। परिजनों ने भी रात में कमरे के भीतर अंगीठी रखे जाने की बात कही है। फिलहाल इसे घटना का संभावित कारण माना जा रहा है। सूचना मिलने के बाद मुफस्सिल थाने की पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इलाज की व्यवस्था पर परिजनों ने उठाए सवाल
अस्पताल पहुंचे परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई। उनका आरोप है कि गंभीर स्थिति में मरीजों को लाने के बावजूद इलाज के लिए इधर-उधर दौड़ना पड़ा। उन्होंने मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है।












