
- 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ की वसूली, CID की पूरक चार्जशीट में कई खुलासे
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित धांधली का बड़ा मामला सामने आया है। परीक्षा में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ से लेकर इंटरव्यू के अंकों में हेरफेर कर मनचाहा पद दिलाने तक का खुलासा हुआ है। सीआईडी ने इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की है। सभी आरोपियों को अगस्त में गिरफ्तार किया गया था।
जांच में सामने आया है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित सेंधमारी कर 11 अभ्यर्थियों से कुल 1.10 करोड़ रुपये वसूले गए। सीडीपीओ पद के लिए 20-20 लाख रुपये की डील तय की गई थी। वहीं, जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में कथित तौर पर 80 अंक बढ़ाकर एक अभ्यर्थी को डीएसपी पद दिलाने का मामला भी सामने आया है।
कॉल डिटेल और मनी ट्रेल से खुली परतें
सीआईडी ने आरोपियों की भूमिका तय करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और पैसों के लेन-देन की कड़ियों की जांच की। जांच में अभ्यर्थियों से संपर्क, रकम की वसूली और उसे सिंडिकेट के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
एजेंट की भूमिका, 11 अभ्यर्थियों से वसूले 1.10 करोड़
बुद्धेश्वर भगत को मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी का करीबी बताया गया है। आरोप है कि वह अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराने का भरोसा देकर उनसे सौदेबाजी करता था। जांच में उसके खिलाफ 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये वसूलने के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज और वसूली गई रकम सिंडिकेट के शीर्ष लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की बताई गई है।
PA पर 80 अंक बढ़वाकर DSP बनवाने का आरोप
जेपीएससी की तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रज कुमार राम की भूमिका भी जांच में सामने आई है। आरोप है कि वह सिंडिकेट और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ का काम करता था। 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाकर एक अभ्यर्थी को डीएसपी बनवाने के मामले में उसकी संलिप्तता बताई गई है। इसके बदले आदित्य पांडे से पांच लाख रुपये लेने का आरोप है।
20 लाख रुपये में तय हुई थी CDPO पद की डील
जांच के अनुसार, सीडीपीओ परीक्षा में चार अभ्यर्थियों के साथ 20-20 लाख रुपये में सेटिंग की गई थी। आरोप है कि चारों अभ्यर्थी परीक्षा में सफल भी हुए। इसके अलावा बिंसिस टेक्नोलॉजी को जेपीएससी का काम दिलाने के लिए मिजोरम के आइजोल जाकर ख्यांगते से मुलाकात करने और उनकी पत्नी को 2.50 लाख रुपये देने के मामले में भी ब्रज कुमार राम की संलिप्तता सामने आई है।
बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक पर भी आरोप
बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण कुमार पर जेपीएससी परीक्षाओं के संचालन का काम अवैध तरीके से हासिल करने की साजिश रचने का आरोप है। सीआईडी की जांच में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका और उनके बीच हुए लेन-देन की कड़ियों को चार्जशीट का आधार बनाया गया है।
मामले में सीआईडी की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की पुष्टि होनी बाकी है।












