
जमशेदपुर : किसी के हाथ में धनुष है तो कोई चढ़ाई की दीवार पर सेकंडों से मुकाबला कर रहा है। खेल अलग हैं, लेकिन सपना एक है—भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन करना। इन सपनों को प्रशिक्षण, सुविधाओं और लगातार सहयोग से आगे बढ़ाने में टाटा स्टील के खेल कार्यक्रम भूमिका निभा रहे हैं। तीरंदाजी से लेकर स्पोर्ट क्लाइंबिंग तक युवाओं को ऐसा मंच मिल रहा है, जहां शुरुआती प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय पहचान का रास्ता तय कर सके।
तीरंदाजी की पाठशाला से निकले नौ ओलंपियन
वर्ष 1996 में जमशेदपुर के जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई टाटा आर्चरी अकादमी इस सफर की अहम कड़ी है। कंपनी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अकादमी अब तक नौ ओलंपियन, नौ अर्जुन पुरस्कार विजेता और 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज तैयार कर चुकी है। एशियाई खेलों में भी इससे जुड़े खिलाड़ियों का योगदान रहा है। वर्ष 2006 में दोहा में जयंत तालुकदार के कांस्य पदक से लेकर बाद की प्रतियोगिताओं तक यह सिलसिला आगे बढ़ा। कंपनी के अनुसार, 2026 के आइची-नागोया एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय महिला रिकर्व टीम में अंकिता भकत की भागीदारी ने इस उपलब्धि को नया विस्तार दिया।
चढ़ाई की दीवार पर तेज हुए सपनों के कदम
टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन यानी टीएसएएफ स्पोर्ट क्लाइंबिंग में युवाओं के लिए अवसर तैयार कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2015 से 16 जमीनी केंद्रों के माध्यम से करीब एक हजार युवाओं को इस खेल से जोड़ा गया है। कंपनी के अनुसार, 2026 के एशियाई खेलों में जोगा पूर्ति और दीपु मल्लेश ने स्पीड क्लाइंबिंग के फाइनल राउंड तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखाई। दोनों ने क्रमशः 7.28 सेकंड और 5.09 सेकंड का समय दर्ज करते हुए नए भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए। साधारण आदिवासी परिवार से आने वाले जोगा का सफर बताता है कि सुविधाओं तक पहुंच और सही मार्गदर्शन मिलने पर प्रतिभा कितनी आगे जा सकती है। अब दोनों खिलाड़ियों की नजर लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक पर है।
सिर्फ अभ्यास नहीं, पूरी तैयारी पर जोर
बड़ी प्रतियोगिता के लिए मैदान में पसीना बहाने के साथ शरीर और मन का तैयार रहना भी जरूरी है। इसी जरूरत को देखते हुए खेल कार्यक्रमों में पोषण, फिजियोथेरेपी, चोट से उबरने, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती पर ध्यान दिया जाता है। वीडियो और तकनीकी विश्लेषण से प्रदर्शन की बारीकियां समझकर प्रशिक्षण में बदलाव किए जाते हैं। क्लाइंबिंग खिलाड़ियों को थाईलैंड के स्पीड कोच और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ दो सप्ताह के विशेष शिविर का अनुभव भी मिला।
अपने शहर में विश्वस्तरीय मुकाबलों का अनुभव
जमशेदपुर में अंतरराष्ट्रीय क्लाइंबिंग प्रतियोगिताओं के आयोजन से स्थानीय युवाओं को बड़े मुकाबले करीब से देखने का अवसर मिलता है। जमशेदपुर और भुवनेश्वर की सुविधाएं तथा क्योंझर में विकसित हो रहा केंद्र इस आधार को मजबूत कर रहे हैं। मकसद अधिक युवाओं को खेल से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर देना है।












