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लखनऊ : देश की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़े के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम थाना और जांच एजेंसियों की कार्रवाई में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए प्रति व्यक्ति 800 रुपये तक वसूलता था। मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि कार्ड स्वीकृत कराने के लिए कई स्तरों पर पैसों का लेन-देन किया जाता था।

फर्जी तरीके से बनाए जा रहे थे आयुष्मान कार्ड

जांच के दौरान पता चला कि गिरोह अपात्र व्यक्तियों को पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में जोड़कर उनके आयुष्मान कार्ड बनवाता था। इसके लिए आवेदकों से 800 रुपये तक लिए जाते थे। कुछ दिनों बाद कार्ड स्वीकृत हो जाता था और लाभार्थी योजना का फायदा उठा सकते थे। पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल में फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तरीके से कितने कार्ड बनाए गए और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था।

मुख्य आरोपी चक्र शेख की भूमिका

मामले में गिरफ्तार आरोपियों में हरदोई जिले के संडीला निवासी चक्र शेख उर्फ अभिषेक उर्फ अजय का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच में पता चला कि वह लखनऊ के बजरंग विहार स्थित एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से इस काम को अंजाम देता था।
पुलिस के अनुसार, वह असली लाभार्थियों की फैमिली आईडी में अपात्र लोगों को जोड़ने का काम करता था। इसके बाद उन्हीं लोगों के आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया जाता था और कार्ड स्वीकृत हो जाता था।

चंद्रभान से हुई थी मुलाकात

जांच में यह भी सामने आया कि CSC संचालक अवनीश ने चक्र शेख की मुलाकात चंद्रभान नामक व्यक्ति से कराई थी। इसके बाद दोनों मिलकर आयुष्मान कार्ड बनवाने के इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए।
पूछताछ में सामने आया कि चंद्रभान कार्ड स्वीकृत कराने के लिए प्रति व्यक्ति 500 रुपये लेता था, जबकि चक्र शेख लाभार्थियों से 800 रुपये तक वसूलता था। इसके बाद रकम का अलग-अलग स्तर पर बंटवारा किया जाता था।

कार्ड अप्रूव कराने वालों तक पहुंचता था हिस्सा

जांच एजेंसियों के अनुसार, चंद्रभान द्वारा ली गई रकम का एक हिस्सा स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) से कार्ड अप्रूव करने वाले विश्वजीत तक पहुंचता था। आरोप है कि जो कार्ड किसी कारणवश प्राथमिक स्तर पर स्वीकृत नहीं हो पाते थे, उन्हें भी फर्जी तरीके से मंजूरी दिलाई जाती थी।हालांकि जांच अभी जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

10 आरोपी गिरफ्तार

मामले में सुजीत कनौजिया, राजेश मिश्रा, सौरभ, चंद्रभान, चक्र शेख उर्फ अभिषेक उर्फ अजय और विश्वजीत समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से आठ आरोपियों को लखनऊ और दो को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

साचीज की सीईओ ने दिया यह बयान

मामले पर साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने कहा कि जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उन्हें हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा मांगे जाने वाले सभी साक्ष्य उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अर्चना वर्मा के अनुसार, बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि लोग किसी भी तरह के जालसाजों के झांसे में न आएं। उन्होंने बताया कि अब जो भी कार्ड संदिग्ध प्रतीत होते हैं, उन्हें पोर्टल पर चिन्हित कर रोक लगा दी जाती है।

जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल थे। 10 गिरफ्तारियों के बाद इस मामले को आयुष्मान योजना में हुई बड़ी सेंध के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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