महापर्व चैती छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण सुबह का अर्घ्य (उषा अर्घ्य) अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ सम्पन्न हुआ। चार दिनों तक कठिन नियमों और तपस्या से किया जाने वाला यह व्रत आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो गया।
भोर की पहली किरण के साथ ही घाटों और तालाबों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। व्रती महिलाएं और पुरुष जल में खड़े होकर भगवान सूर्य और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए अर्घ्य अर्पित करते दिखे। वातावरण भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
इस अवसर पर व्रतियों ने पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा किया। ठेकुआ, फल, गन्ना और अन्य पारंपरिक प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच बांटे गए।
छठ महापर्व हमें प्रकृति, सूर्य और जल के महत्व का संदेश देता है। यह पर्व स्वच्छता, अनुशासन और सामूहिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जिससे समाज में एकता और प्रेम की भावना मजबूत होती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई छठी मैया की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।


