धनबाद: धनबाद पुलिस ने शनिवार को साइबर अपराध के एक बड़े और शातिर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य ग्रामीण इलाकों के लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। उनके नाम पर मोबाइल सिम और बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराध से जुड़े लेन-देन को अंजाम दिया जा रहा था। गिरोह का नेटवर्क बलियापुर से लेकर टुंडी तक फैले होने की बात सामने आई है।
मामले का खुलासा टेलीकम्युनिकेशन विभाग से मिली सूचना के बाद पुलिस की कार्रवाई में हुआ। इसके बाद सिंदरी सीडीपीओ के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने छापेमारी और जांच के दौरान गिरोह से जुड़े कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर खुलवाते थे सिम
धनबाद के ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरोह का तरीका काफी शातिर था। आरोपी ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर बलियापुर स्थित एक मोबाइल दुकान पर ले जाते थे। वहां उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर मोबाइल सिम जारी करवाया जाता था। जांच में पता चला है कि एक व्यक्ति के नाम पर 10 से 15 तक सिम कार्ड जारी कराए गए थे।
सिम के साथ बैंक खाते भी बनते थे
गिरोह केवल मोबाइल सिम तक सीमित नहीं था। ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते भी खुलवाए जाते थे। इन बैंक खातों को फर्जी सिम से लिंक कराया जाता था। इसके बाद पासबुक और एटीएम कार्ड आरोपियों द्वारा अपने पास रख लिए जाते थे। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध के जरिए हासिल रकम को इन्हीं बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया जाता था। इस तरह ग्रामीणों के दस्तावेज और बैंक खातों को साइबर अपराधियों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच आगे बढ़ने पर होंगे बड़े खुलासे
ग्रामीण एसपी ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गिरोह के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर अपराध से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया।


