
जमशेदपुर: टाटा समूह के अगले बड़े नेतृत्व को लेकर कॉरपोरेट जगत में चर्चा तेज है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बाद कमान किसके हाथ होगी, इसे लेकर कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी बीच जमशेदपुर से जुड़े टाटा स्टील के प्रमुख टीवी नरेंद्रन का नाम संभावित दावेदारों में सामने आया है।
नरेंद्रन का टाटा समूह से जुड़ाव करीब चार दशक पुराना है। टाटा स्टील में लंबे अनुभव और कंपनी के वैश्विक कारोबार की समझ के कारण उन्हें इस दौड़ का मजबूत आंतरिक चेहरा माना जा रहा है।
टाटा स्टील से शुरू हुआ लंबा सफर
टीवी नरेंद्रन ने 1988 में टाटा स्टील के साथ अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने कंपनी और टाटा समूह में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
टाटा स्टील के नेतृत्व में रहते हुए उन्होंने कंपनी के भारतीय कारोबार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही लंबा अनुभव उन्हें टाटा संस के शीर्ष पद के संभावित उम्मीदवारों में अलग स्थान देता है।
जमशेदपुर कनेक्शन बना बड़ी वजह
टाटा समूह और जमशेदपुर का रिश्ता दशकों पुराना है। शहर की पहचान टाटा स्टील से जुड़ी है और नरेंद्रन लंबे समय से इसी कंपनी के नेतृत्व का प्रमुख चेहरा हैं।
ऐसे में अगर भविष्य में टाटा संस की कमान नरेंद्रन को मिलती है, तो इसे जमशेदपुर के लिए भी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाएगा। हालांकि, फिलहाल यह संभावना और मीडिया रिपोर्टों में सामने आया नाम है, कोई आधिकारिक घोषणा नहीं।
सिर्फ नरेंद्रन ही नहीं, दो और नाम चर्चा में
उत्तराधिकारी की संभावित दौड़ में नरेंद्रन के साथ सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।
सौरभ अग्रवाल टाटा संस में वित्त और रणनीतिक मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं। वहीं आशीष चौहान वित्तीय बाजार के अनुभवी नाम हैं और टाटा समूह के बाहर से आने वाले संभावित दावेदार के रूप में चर्चा में हैं।
अब नजर टाटा संस के फैसले पर
टाटा संस के चेयरमैन का फैसला पूरे टाटा समूह के भविष्य की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसलिए उत्तराधिकारी के चयन में अनुभव, नेतृत्व क्षमता, समूह की कंपनियों की समझ और भविष्य की रणनीति जैसे पहलुओं को अहम माना जा सकता है।
फिलहाल टीवी नरेंद्रन का नाम इसलिए सबसे ज्यादा दिलचस्प है क्योंकि वे टाटा समूह के भीतर से आने वाले अनुभवी नेता हैं और जमशेदपुर से उनका मजबूत जुड़ाव है।
अगर भविष्य में उनके नाम पर मुहर लगती है, तो यह सिर्फ टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि जमशेदपुर से निकले एक बड़े कॉरपोरेट चेहरे के टाटा समूह के शीर्ष पद तक पहुंचने की कहानी भी होगी।
हालांकि, अंतिम निर्णय होने तक इसे संभावित उत्तराधिकारी की चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।











