
- तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में छह महीने से सरकारी एंबुलेंस नहीं होने का दावा, गंभीर हालत में निजी वाहन से सदर अस्पताल ले जाने की नौबत; 18 साल से अधूरे और खंडहरनुमा भवन में संचालित हो रहा स्वास्थ्य केंद्र
तांतनगर (पश्चिमी सिंहभूम) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक गंभीर मामला सामने आया है। तांतनगर अंचल कार्यालय में कार्यरत राजस्व उपनिरीक्षक राजेश कुमार की बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। कार्यालय में काम करने के दौरान वह बेहोश होकर गिर पड़े। साथी कर्मचारियों ने आनन-फानन में उन्हें तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। आरोप है कि वहां उन्हें समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल सकी और सदर अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं हुई। आखिरकार उन्हें निजी वाहन से सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की सुविधा मिलनी चाहिए, वहां कथित तौर पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव सामने आया है।
कार्यालय में काम करते समय अचानक बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, राजस्व उपनिरीक्षक राजेश कुमार बुधवार को तांतनगर अंचल कार्यालय में अपना काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए। कार्यालय में मौजूद साथी कर्मचारियों ने उन्हें संभाला और तत्काल तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि अस्पताल में प्राथमिक उपचार मिलने के बाद उनकी स्थिति में सुधार होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा जाएगा।
लेकिन आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर मरीज के लिए जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो सकीं। कर्मचारियों के अनुसार, राजेश कुमार को ऑक्सीजन देने में परेशानी हुई। सदर अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली। इसके बाद उन्हें निजी वाहन से सदर अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। हालांकि, उन्हें बचाया नहीं जा सका।
छह महीने से सरकारी एंबुलेंस नहीं होने का दावा
तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले छह महीने से सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। आपात स्थिति में मरीजों को दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समय पर बड़े अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की उपलब्धता बेहद जरूरी है। खासकर हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना और सांस लेने में परेशानी जैसी स्थितियों में शुरुआती उपचार के साथ समय पर अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है।
स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी एंबुलेंस नहीं होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं के लिए ममता वाहन की सुविधा होने की बात कही गई है, जबकि अन्य आपात स्थितियों में 108 एंबुलेंस सेवा पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन जरूरत के समय एंबुलेंस कितनी जल्दी उपलब्ध होती है, यह बड़ा सवाल है।
सिविल सर्जन ने क्या कहा?
पश्चिमी सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. मीना कालुंडिया के अनुसार, तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की अपनी सरकारी एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए ममता वाहन उपलब्ध है। अन्य मरीजों को निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि 108 एंबुलेंस को रांची से फोन के माध्यम से लाइनअप किया जाता है। कभी-कभार एंबुलेंस देर से पहुंचने की शिकायत मिलती है। पूर्व के सिविल सर्जनों ने भी एंबुलेंस की मांग की है।
सिविल सर्जन के इस बयान से स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस की उपलब्धता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है। सवाल यह है कि जब किसी मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाए, तो उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और बड़े अस्पताल तक पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या है?
18 साल से अधूरे और खंडहरनुमा भवन में चल रहा अस्पताल
तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की समस्या केवल एंबुलेंस तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 से यह अस्पताल अधूरे और खंडहरनुमा भवन में संचालित हो रहा है। करीब 18 साल से भवन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने का मामला भी सामने आया है।
ऐसे में अस्पताल की आधारभूत संरचना, मरीजों की सुरक्षा और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक उपचार का महत्वपूर्ण सहारा होता है। यदि वहां पर्याप्त संसाधन और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध नहीं हों, तो मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग उठ रही है। अस्पताल भवन की स्थिति में सुधार, ऑक्सीजन की उपलब्धता और एंबुलेंस की स्थायी व्यवस्था ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण जरूरतें हैं।
कर्मचारियों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
राजस्व उपनिरीक्षक की मौत के बाद साथी कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि आपात स्थिति में किसी मरीज को जरूरी उपचार के लिए भटकना नहीं पड़े। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों और आम ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने रखे हैं। किसी कर्मचारी या नागरिक की तबीयत अचानक बिगड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार और जरूरत पड़ने पर समय पर रेफरल की व्यवस्था होनी चाहिए।
चिकित्सा प्रभारी ने नहीं उठाया फोन
मामले में तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। जानकारी के अनुसार, उन्हें पांच बार फोन किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इस कारण उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
अब स्वास्थ्य विभाग से जवाबदेही की मांग
राजेश कुमार की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि तांतनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सुविधाओं की स्थिति क्या है और मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने क्या व्यवस्था की है। सरकारी एंबुलेंस की कमी, ऑक्सीजन की उपलब्धता और अस्पताल भवन की स्थिति की समीक्षा जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि एंबुलेंस की मांग पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है और ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
राजेश कुमार की मौत ने तांतनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, ऑक्सीजन और एंबुलेंस की अनुपलब्धता का उनकी मौत पर क्या चिकित्सकीय प्रभाव पड़ा, यह जांच और चिकित्सा संबंधी तथ्यों से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन सुविधाओं की उपलब्धता पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत सामने रखी है।












