
जमशेदपुर/पोटका : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में जमीन की कथित खरीद-बिक्री से जुड़ा मामला चर्चा का विषय बन गया है। धीरोल पंचायत के बांगो टोला नूतनडीह में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निजी जमीन बेचने की आड़ में तीन एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को भी सौदे में शामिल कर दिया गया। आरोप है कि यह जमीन जमशेदपुर के एक अधिकारी की चिकित्सक पत्नी को बेची गई है। शिकायत मिलने के बाद अंचल प्रशासन ने मामले की जांच और जमीन की मापी शुरू कर दी है।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद खुला मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित भूखंड की घेराबंदी शुरू होने के बाद उन्हें सरकारी जमीन पर कब्जे का संदेह हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी शिकायत अंचल कार्यालय में की। मामले की गंभीरता को देखते हुए अंचलाधिकारी निकिता बाला विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और विवादित जमीन का निरीक्षण कराया। प्रशासन की मौजूदगी में भूखंड की सीमा निर्धारित करने के लिए मापी शुरू की गई। जांच टीम जमीन के नक्शे, खतियान, रजिस्टर और खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
निजी भूमि के साथ सरकारी जमीन बेचने का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि गांव के छह लोगों ने अपनी निजी जमीन का सौदा किया था, लेकिन उसी की आड़ में आसपास स्थित सरकारी जमीन को भी निजी भूखंड बताकर शामिल करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कथित रूप से तीन एकड़ से अधिक सरकारी जमीन इस सौदे और घेराबंदी की जद में आ गई। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अभी प्रशासनिक जांच चल रही है। जमीन खरीदने और बेचने वाले पक्ष की भूमिका तथा संबंधित दस्तावेजों की वैधता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मापी शुरू होते ही संबंधित लोगों में हलचल
अंचल प्रशासन की टीम के मौके पर पहुंचने और मापी शुरू होने के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई। ग्रामीण अब यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि विवादित भूखंड का कितना हिस्सा निजी है और कितनी भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अतिक्रमण मिला तो खाली कराई जाएगी जमीन
अंचलाधिकारी ने कहा है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि मापी और दस्तावेजों की जांच में सरकारी जमीन पर कब्जा पाया जाता है, तो उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। साथ ही गलत तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री या घेराबंदी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि यह सामान्य जमीन विवाद है या इसके पीछे किसी बड़े भूमि खेल की परतें छिपी हैं।











