
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी चुनावी रणनीति को धार देने के साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इसी कड़ी में लखनऊ में 2-3 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अहम मानी जा रही है।
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। केंद्रीय एवं राज्य के मंत्री, जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी भी बैठक का हिस्सा होंगे।
विपक्ष के नैरेटिव की काट पर फोकस
राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने टीम यूपी के सामने मिशन-2027 का खाका रखते हुए विपक्षी दलों के नैरेटिव को तोड़ने, प्रभावी स्लोगन और नारों के जरिए माहौल बनाने तथा रात्रि प्रवास और चौपाल के माध्यम से मतदाताओं से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया है।
इन मुद्दों को कार्यसमिति की बैठक में विस्तार से रखा जाएगा। इसके बाद संगठनात्मक स्तर पर इन्हें जमीन पर उतारने की तैयारी होगी।
अयोध्या से आरक्षण तक कई मुद्दे चुनौती
भाजपा के सामने 2027 के चुनाव में कई राजनीतिक चुनौतियां हैं। अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, यूजीसी और आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष के हमलों के अलावा ब्राह्मण और ओबीसी राजनीति में उबाल भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बताया जा रहा है।
संभल, रामपुर, मुरादाबाद और सहारनपुर जैसे जिलों में ध्रुवीकरण की राजनीतिक चर्चाएं भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।
सहयोगी दलों का दबाव भी बढ़ा
एनडीए के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोक दल और निषाद पार्टी अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पिछड़ों के हक और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर भाजपा पर दबाव बना रहे हैं।
ऐसे में कार्यसमिति की बैठक में सहयोगी दलों के साथ तालमेल और सीटों के समीकरण को लेकर भी पार्टी की रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
संगठन के भीतर की चुनौतियों पर भी नजर
भाजपा के लिए सिर्फ विपक्ष ही चुनौती नहीं है। संगठन के भीतर भी कुछ मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों तक अधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन की शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं क्षेत्रीय संगठन के विस्तार को लेकर भी विरोध और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कार्यसमिति की बैठक इन सभी मुद्दों पर मंथन कर संगठन के लिए एक स्पष्ट लाइन तय कर सकती है।
मथुरा-वृंदावन पर भी बढ़ सकता है फोकस
पार्टी की रणनीति में मथुरा-वृंदावन को लेकर हिंदुत्व की लहर को और धार देने का प्रयास भी शामिल हो सकता है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अनुसार, जल्द ही मोर्चों की क्षेत्रीय टीमों और कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा कर संगठन का आकार पूरा किया जाएगा।
2027 की जंग से पहले लखनऊ में होने वाली यह बैठक भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से संगठन, सहयोगी दलों और चुनावी मुद्दों को लेकर अगले चरण की रणनीति का खाका सामने आ सकता है।











