
जमशेदपुर : दलमा वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटक कॉटेज और गेस्ट हाउस के निर्माण का मामला केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की जांच के दायरे में है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की पूर्व मंजूरी के बिना निर्माण किए जाने के आरोपों पर सोमवार की सुनवाई में समिति ने वन विभाग से जवाब मांगा। वन और पर्यटन विभाग को लिखित जवाब अथवा शपथपत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। अगली सुनवाई और विभागों के जवाब के आधार पर आगे का निर्णय होगा।
नियमों की अनदेखी पर समिति ने उठाए सवाल
सुनवाई में दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी वन विभाग की ओर से उपस्थित हुए। समिति ने पूछा कि वन क्षेत्र में सरकारी धन खर्च करने और निर्माण कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। समिति ने यह सवाल भी उठाया कि नियमों का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। विभागों की ओर से लिखित जवाब या शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।
मकुलाकोचा और पिंड्राबेड़ा के निर्माण पर आपत्ति
याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि अभयारण्य के मकुलाकोचा और पिंड्राबेड़ा में पर्यटक कॉटेज का निर्माण कराया जा रहा है। याचिका के अनुसार, इसमें वन विभाग और पर्यटन विभाग की वित्तीय सहायता का इस्तेमाल किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्माण से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। साथ ही वन संरक्षण संबंधी जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
स्वीकृत प्रबंधन योजना का दिया हवाला
याचिका में वर्ष 2020 में तैयार दलमा अभयारण्य की स्वीकृत प्रबंधन योजना का उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, योजना में नए पर्यटक कॉटेज के निर्माण का प्रावधान नहीं है। योजना के अध्याय आठ में शामिल इको-डेवलपमेंट गतिविधियों में भी नए कॉटेज बनाने का उल्लेख नहीं होने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर निर्माण गतिविधियों पर आपत्ति जताई और आवश्यक अनुमतियों के बिना काम कराने वालों की जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया।
निर्माण रोकने के पुराने आदेश पर भी चर्चा
सुनवाई में यह बात सामने आई कि निर्माण कार्य रोकने का आदेश पहले दिया जा चुका है। इसके बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल कायम हैं। याचिकाकर्ता ने निर्माण गतिविधियां तत्काल रोकने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की सिफारिश करने की मांग रखी है। हालांकि, इस मांग पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
विभागीय जवाब तय करेगा आगे की कार्रवाई
CEC ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई के बाद मामले में फैसला लिया जाएगा। वन और पर्यटन विभाग के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि निर्माण की अनुमति और प्रक्रिया को लेकर उनका पक्ष क्या है। फिलहाल दोनों विभागों को दो सप्ताह में अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।












