
जमशेदपुर : नदी का नजारा देखकर लाखों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले लोगों के सामने अब सुरक्षा की चिंता खड़ी हो गई है। बाढ़ के बाद स्वर्णरेखा और खरकई नदी के किनारे कई स्थानों पर मिट्टी कटने की स्थिति सामने आई है। सोनारी के आगे दोबो से मानगो तक नदी के पास बने भवनों के आसपास कटाव की खबरों ने निर्माण की अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल बढ़ा दिए हैं। हालांकि, संबंधित इमारतों की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगी।
नोटिस के बाद कार्रवाई आगे बढ़ने का इंतजार
नदी किनारे अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद शुरू हुई थी। जिला प्रशासन ने मानगो, जुगसलाई और कल्याणनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों में 145 अवैध मकानों को हटाने के लिए नोटिस दिए थे। इसके बावजूद इन्हें हटाने की दिशा में ठोस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, नदी के पास खड़ी बहुमंजिला इमारतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ के बाद आसपास की जमीन में कटाव होने से इन निर्माणों की अनुमति और सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग बढ़ी है। नोटिस वाले मकानों और बहुमंजिला परियोजनाओं के मामलों की स्थिति अलग-अलग जांच से स्पष्ट होनी है।
भवनों की मंजूरी और मौके की स्थिति की जांच जरूरी
पर्यावरणविद् आरके सिंह के अनुसार, नदी किनारे कटाव रोकने के लिए पहले से दिशा-निर्देश मौजूद हैं। भवनों का नक्शा मंजूर करते समय संबंधित नियमों और स्थल की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन भी जरूरी है। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है, तो संबंधित मामलों में कार्रवाई होनी चाहिए। कटाव की स्थिति के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि निर्माण से पहले जरूरी जांच कितनी गंभीरता से की गई थी।
अर्जुन मुंडा भी उठा चुके हैं निर्माण का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा नदी किनारे बने भवनों और उन्हें दी गई मंजूरी पर पहले ही सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि ऐसे निर्माणों को अनुमति देने में सरकारी नियमों की अनदेखी हुई है। उन्होंने नदी, जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कदम उठाने की मांग की थी। अब बाढ़ के बाद सामने आई परिस्थितियों ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है। निवासियों की चिंता केवल संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित रहने की व्यवस्था से भी जुड़ी है।
डीसी ने जांच कराने की कही बात
जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन ने मामले को देखने और जांच कराने की बात कही है। वहीं, क्षेत्रीय प्रदूषण पदाधिकारी जितेंद्र सिंह के अनुसार, नदी के कटाव और अतिक्रमण से संबंधित रिपोर्ट एनजीटी के आदेश के अनुरूप सौंपी जा चुकी है। आगे की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर की जानी है। जांच से अनुमति की स्थिति, नियमों के पालन और जरूरी सुरक्षा उपायों पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।












