
जमशेदपुर : दिवाली नजदीक आते ही पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोड़ाम, बामनी और गोबरघुसी समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में लाल आंखों वाले चमकीले हरे कीट लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। शाम ढलते ही घरों की दीवारों और बल्ब के आसपास दिखाई देने वाले इन कीटों को देखकर कई लोग हैरान हो रहे हैं। लाल या गुलाबी आंखें, पत्ते जैसा हरा शरीर और अचानक उड़ने की आदत के कारण लोग इन्हें कौतूहल से देख रहे हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें दिवाली कीड़ा या हरा टोटका भी कहा जाता है। हालांकि, इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन इनकी सही पहचान करना जरूरी है।
रोशनी की ओर क्यों खिंचे चले आते हैं ये कीट?
दिवाली के आसपास घरों में रोशनी बढ़ जाती है। शाम होते ही बल्ब और अन्य प्रकाश स्रोतों के आसपास कई तरह के कीट मंडराने लगते हैं। इनमें कुछ हरे रंग के पादपभक्षी कीट भी हो सकते हैं। प्रकाश के प्रति आकर्षित होने के कारण ये घरों की दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों के आसपास दिखाई देते हैं।
पटमदा और बोड़ाम जैसे ग्रामीण इलाकों में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। फसल के मौसम में विभिन्न प्रकार के कीटों की मौजूदगी भी देखी जाती है। हालांकि, केवल हरे रंग और लाल आंखों के आधार पर इस कीट की वैज्ञानिक पहचान नहीं की जा सकती है। इसके लिए विशेषज्ञ की राय जरूरी है।
न काटने का डर, न बीमारी फैलने की आशंका?
इस तरह के कई कीट इंसानों पर हमला नहीं करते और मुख्य रूप से पौधों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। फिर भी बिना पहचान के किसी भी कीट को पूरी तरह हानिरहित मानना उचित नहीं है। लोगों को इसे पकड़ने, कुचलने या नंगे हाथों से छूने से बचना चाहिए।
हरे रंग के सभी कीट नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रजातियां फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए घरों में इनकी मौजूदगी और खेतों में इनकी संख्या बढ़ने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
धान की फसल के लिए हो सकते हैं नुकसानदायक
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन लीफहॉपर यानी हरे फुदके की कुछ प्रजातियां धान की फसल के लिए नुकसानदायक होती हैं। ये पौधों का रस चूसती हैं। कुछ प्रजातियां धान में टुंग्रो जैसे विषाणुजनित रोगों के प्रसार में भी भूमिका निभाती हैं। इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और उत्पादन घट सकता है।
हालांकि, तस्वीर में दिखाई दे रहे कीट को ग्रीन लीफहॉपर ही मान लेना सही नहीं होगा। इसकी वैज्ञानिक पहचान होने के बाद ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि इससे धान की फसल या आसपास के पौधों को कितना नुकसान हो सकता है।
घर में दिखाई दे तो क्या करें?
यदि घर की दीवार या बल्ब के आसपास ऐसा कोई कीट दिखाई दे तो घबराकर उसे मारने की जरूरत नहीं है। खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाने और रात में अनावश्यक रोशनी कम रखने से घर के अंदर कीटों का प्रवेश कम किया जा सकता है। यदि कीट घर के भीतर आ जाए तो कागज या किसी सुरक्षित साधन की मदद से उसे बाहर छोड़ा जा सकता है।
कीट को मारने के लिए कमरे में रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव करने से बचना चाहिए। इससे घर में रहने वाले लोगों और अन्य जीवों को भी नुकसान हो सकता है। वहीं, यदि खेतों में किसी कीट की संख्या अधिक दिखाई दे तो किसान कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही उचित कदम उठाएं।
दिवाली के आसपास क्यों बढ़ जाती है इनकी चर्चा?
दिवाली के समय रोशनी, मौसम में बदलाव और कृषि गतिविधियों के कारण कीटों की मौजूदगी लोगों का ध्यान खींचती है। धान की फसल वाले क्षेत्रों में अलग-अलग प्रजातियों के कीट दिखाई देना सामान्य मौसमी गतिविधियों का हिस्सा हो सकता है। लेकिन जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में इस बार इनकी संख्या बढ़ने का कोई विशेष कारण है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए स्थानीय स्तर पर अध्ययन और विशेषज्ञों की राय जरूरी है।
फिलहाल, लाल आंखों वाले हरे कीट को देखकर घबराने के बजाय सावधानी बरतना बेहतर है। इसकी पहचान किए बिना न तो इसे खतरनाक बताना उचित है और न ही पूरी तरह हानिरहित। सही जानकारी ही लोगों के मन से डर दूर करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकती है।












