
जमशेदपुर: बारिश के साथ शहर में जलजमाव बढ़ने के बीच डेंगू का खतरा भी सामने आने लगा है। जमशेदपुर में इस सीजन डेंगू का पहला मामला सामने आया है। बिष्टुपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) के नर्सिंग हॉस्टल में रहने वाली 28 वर्षीय युवती की एलाइजा जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमित युवती का इलाज TMH में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है।
मरीज में कई दिनों से तेज बुखार के साथ सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत थी। शुरुआती उपचार के बाद भी जब उसकी तबीयत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने डेंगू की आशंका में जांच कराने का निर्णय लिया। जिला सर्विलांस टीम की निगरानी में सैंपल की जांच कराई गई, जिसमें डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई।
पहला केस मिलते ही एक्टिव हुआ स्वास्थ्य विभाग
डेंगू की पुष्टि होते ही जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य टीम ने नर्सिंग हॉस्टल और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों की नजर विशेष रूप से उन स्थानों पर है, जहां बारिश का पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीज के आवास स्थल के आसपास करीब 500 मीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र में रखा है। टीम संभावित लार्वा स्रोतों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने की कार्रवाई कर रही है।
लार्वा मिलने वाले स्थानों पर कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित इलाके में एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके अलावा मच्छरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए फॉगिंग भी कराई जा रही है। विभाग का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही मच्छरों के प्रजनन को रोकना और संक्रमण को दूसरे लोगों तक पहुंचने से बचाना है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि घरों, हॉस्टल, दुकानों और आसपास के इलाकों में पानी जमा न होने दें। खासकर कूलर, गमले, टायर, खाली डिब्बे और अन्य बर्तनों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करने की सलाह दी गई है।
अस्पतालों को अलर्ट रहने का निर्देश
डेंगू का पहला मामला सामने आने के बाद जिले के अस्पतालों को भी सतर्क किया गया है। बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण वाले मरीजों की जांच पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध मरीजों के लिए अलग बेड की व्यवस्था रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बारिश के दौरान डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने और समय पर जांच कराने की जरूरत है।

