विजय गोप/सरायकेला : 25 करोड़ की लागत से गांगुडीह में बनकर तैयार चांडिल अनुमंडल अस्पताल का नया भवन आज भी जनता के लिए बंद है, ऐसे में मरीजों को आज भी पुराने और जर्जर भवन में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में संचालित अनुमंडल अस्पताल की स्थिति बद से बदतर है। 50 बेड की जगह सिर्फ लेबर रूम में ही बेड उपलब्ध हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर बोर्ड तक नहीं है, जिससे राहगीरों को पता ही नहीं चलता कि यहां अस्पताल है। पूरे परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और लैब लाखों की लागत से लगे हैं, लेकिन खुलने का कोई समय तय नहीं। बिजली जाने पर चलने वाला सोलर सिस्टम वर्षों से खराब पड़ा है।
हाईमास्ट लाइट के सोलर पैनल टूटे हुए हैं। प्रतीक्षालय के बगल में खुले पड़े पोलियो के डब्बों में बरसात का पानी जमा है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा है।
6 एम्बुलेंस की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 1 ही चालू है। बाकी का गियरबॉक्स या इंजन खराब है। जरूरत के हिसाब से 13 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन सीमित डॉक्टर होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
2008 से अटका है निर्माण
चांडिल अनुमंडल अस्पताल के नए भवन का शिलान्यास 2008 में तत्कालीन विधायक सुधीर महतो ने किया था। निर्माण लागत 6.10 करोड़ थी 2012 तक पूरा होना था, लेकिन राशि कम होने का हवाला देकर काम अधूरा रह गया। 2019 में फिर ₹1.5 करोड़ से मरम्मत की निविदा निकली, वो भी अधूरी रही। आखिरकार ईचागढ़ विधायक सविता महतो के प्रयास से 6 दिसंबर 2023 को ₹17 करोड़ की लागत से नए भवन का निर्माण शुरू हुआ। अब यह भवन लगभग ₹25 करोड़ की लागत से 50 बेड, OT, लैब, लेबर रूम, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर-नर्स के लिए क्वार्टर के साथ पूरी तरह तैयार है।
दुर्घटना बहुल क्षेत्र, फिर भी अस्पताल बंद
चांडिल क्षेत्र से NH-32 का 30 KM और NH-33 का 55 KM हिस्सा गुजरता है। यहां आए दिन सड़क हादसे होते हैं। नए अस्पताल के नहीं खुलने से घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे जमशेदपुर MGM रेफर कर दिया जाता है। इस मामले में सिविल सर्जन का कहना है कि भवन निर्माण विभाग द्वारा भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। उद्घाटन के लिए DC और स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव को पत्र लिखा गया है। उद्घाटन के बाद ही अस्पताल शुरू किया जाएगा। स्टाफ की कमी पूरे राज्य में है, लेकिन उपलब्ध कर्मियों से ही अस्पताल चलाया जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय आशुदेव महतो ने कहा कि जितनी जल्दी हो सके नए अस्पताल को शुरू किया जाए। कोई गंभीर दुर्घटना होने पर मरीज को रांची या टाटा ले जाने में जान का खतरा रहता है।
जब ₹25 करोड़ खर्च कर आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बनकर तैयार है, तो फिर जनता को उसका लाभ कब मिलेगा? अब देखना है कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और चांडिल अनुमंडल अस्पताल को आम लोगों के लिए कब शुरू करता है?



