
जमशेदपुर: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बिष्टुपुर स्थित एक होटल में आदर्श सेवा संस्थान और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संयुक्त तत्वावधान में परिचर्चा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बाल श्रम उन्मूलन के लिए 30 दिवसीय विशेष ‘एक्शन मंथ’ अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बाल मजदूरी के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष डॉ. निर्मला शुक्ला ने की। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना ही बाल श्रम रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। संस्था की सचिव प्रभा जायसवाल ने कहा कि बाल मजदूरी बच्चों को उनके बचपन, शिक्षा और अधिकारों से वंचित कर देती है। उन्होंने सभी विभागों और सामाजिक संगठनों से सहयोग की अपील की।
परिचर्चा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रम विभाग, बाल कल्याण समिति, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्डलाइन, स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने कहा कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा, पुनर्वास और प्रायोजन योजनाओं से जोड़ा जाएगा। वहीं पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों की परामर्श प्रक्रिया, नशा मुक्ति अभियान और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
प्रतिनिधियों ने ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, जन्म पंजीकरण को बढ़ावा देने तथा बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाने का संकल्प लिया। श्रम विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और बच्चों को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर बल दिया।
वक्ताओं ने बाल तस्करी को गंभीर चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मीडिया प्रतिनिधियों ने कहा कि जन-जागरूकता के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
