
गढ़वा : देश में 5जी नेटवर्क के विस्तार और गांव-गांव तक तेज इंटरनेट पहुंचाने के दावों के बीच झारखंड के गढ़वा जिले से संचार व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। खरौंधी प्रखंड के सोन तटीय क्षेत्र में बसे खोखा और पड़रच गांव के लोग आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि फोन पर बात करने के लिए ग्रामीणों को ऊंचे स्थान या पेड़ का सहारा लेना पड़ता है।
नेटवर्क की तलाश में पेड़ों तक पहुंचते हैं लोग
ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन पर मोबाइल रखने से फोन में नेटवर्क नहीं आता। कभी-कभार 20 से 30 फीट की ऊंचाई पर सिग्नल मिल पाता है। ऐसे में कुछ लोग मोबाइल को कपड़े की सहायता से पेड़ की डाल पर बांध देते हैं और नीचे बैठकर कॉल या जरूरी संदेश आने का इंतजार करते हैं। संपर्क स्थापित होने पर भी आवाज स्पष्ट नहीं आती और बातचीत बार-बार बाधित होती है।
आपात स्थिति में बढ़ जाती है चिंता
मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता केवल बातचीत तक सीमित समस्या नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी, दुर्घटना अथवा दूसरी आपात परिस्थितियों में अस्पताल, एंबुलेंस या रिश्तेदारों से तत्काल संपर्क करना कठिन हो जाता है। कई बार जरूरी कॉल और संदेश घंटों बाद मिलते हैं, जिससे परिवारों की चिंता और परेशानी बढ़ जाती है। खोखा गांव के पंकज कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, कौशल कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह और सतीश कुमार सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि नेटवर्क नहीं रहने के कारण गांव की महत्वपूर्ण सूचनाएं भी समय पर संबंधित लोगों तक नहीं पहुंच पातीं।
पढ़ाई, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं भी प्रभावित
डिजिटल दौर में मोबाइल नेटवर्क शिक्षा, ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान और रोजगार संबंधी कार्यों का प्रमुख माध्यम बन चुका है। लेकिन कमजोर कनेक्टिविटी के कारण बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई और युवाओं के डिजिटल काम प्रभावित हो रहे हैं। आवश्यक ऑनलाइन आवेदन या लेन-देन के लिए लोगों को नेटवर्क वाले दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी कुमारी देवी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती बच्चे से संबंधित फोन का इंतजार करने के लिए उन्हें मोबाइल पेड़ पर बांधना पड़ा। नेटवर्क कमजोर होने के कारण जरूरी सूचना समय पर मिलने को लेकर परिवार लगातार चिंतित रहता है।
ग्रामीणों ने मांगा स्थायी समाधान
गांव के लोगों ने प्रखंड प्रशासन और संबंधित दूरसंचार कंपनियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में मोबाइल टावर अथवा उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था स्थापित की जाए। ग्रामीणों का सवाल है कि जब देश के बड़े हिस्से में 5जी सेवाएं पहुंच रही हैं, तब उनके गांव को सामान्य मोबाइल नेटवर्क भी क्यों नहीं मिल रहा? उनका मानना है कि डिजिटल इंडिया का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब दूरदराज के अंतिम गांव तक भरोसेमंद नेटवर्क सुविधा पहुंचेगी।










